ट्रंप प्रशासन को जन्मसिद्ध नागरिकता के मुद्दे पर अदालत से झटका
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वॉशिंगटन। अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन को जन्म के आधार पर नागरिकता के अधिकार को सीमित करने की कोशिश में एक बार फिर कानूनी अड़चन का सामना करना पड़ा है। संघीय न्यायाधीश डेबरा बोर्डमैन ने प्रशासन के उस नए कार्यकारी आदेश के अमल पर रोक लगा दी, जिसके जरिए जन्मसिद्ध नागरिकता के दायरे को सीमित करने का प्रयास किया गया था।
न्यायाधीश बोर्डमैन ने अपने फैसले में प्रारंभिक निषेधाज्ञा जारी करते हुए कहा कि ट्रंप प्रशासन का यह आदेश प्रथम दृष्टया असंवैधानिक प्रतीत होता है और अमरीकी संविधान के 14वें संशोधन से टकरा सकता है। यह मामला प्रवासियों के अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठनों की ओर से अदालत में दायर किया गया था। इन संगठनों ने ट्रंप प्रशासन की पहले की उस कोशिश को भी चुनौती दी थी, जिसमें जन्म के साथ मिलने वाली नागरिकता के अधिकार को सीमित करने का प्रयास किया गया था।
35 पन्नों के फैसले में न्यायाधीश बोर्डमैन ने कहा कि संबंधित वर्ग के लोगों पर आदेश लागू किए जाने की संभावना लगभग निश्चित रूप से संवैधानिक कसौटी पर खरी नहीं उतरती। उन्होंने जून में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले का भी उल्लेख किया, जिसमें ट्रंप के राष्ट्रपति पद के पहले दिन जारी किए गए जन्मसिद्ध नागरिकता से जुड़े कार्यकारी आदेश पर रोक लगाने की दिशा में फैसला आया था।
राष्ट्रपति जो बाइडेन द्वारा नियुक्त न्यायाधीश बोर्डमैन ने कहा कि अदालत को नागरिकता के संवैधानिक अधिकार को प्रभावित करने वाले ट्रंप प्रशासन के इस नए प्रयास पर भी प्रारंभिक रोक लगानी होगी।
अदालत के आदेश के मुताबिक प्रशासन 19 फरवरी, 2025 के बाद अमरीका में जन्मे उन बच्चों पर नई पाबंदियां लागू नहीं कर सकेगा, जिनके माता-पिता में से एक या दोनों बच्चे के जन्म के समय अमरीका में कानूनी स्थिति में नहीं थे।
न्यायाधीश ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए जन्मसिद्ध नागरिकता से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों की ओर भी ध्यान दिलाया।
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