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हिमाचल में ईको-टूरिज्म को बढ़ावा, 200 करोड़ का लक्ष्य

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हिमाचल में ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देने की तैयारी, पांच साल में 200 करोड़ राजस्व जुटाने का लक्ष्य

हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में वन विभाग ने बड़ी योजना तैयार की है। ईको-टूरिज्म को विस्तार देने के लिए तैयार किए गए मास्टर प्लान के तहत सरकार ने आगामी पांच वर्षों में इस क्षेत्र से 200 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित करने का लक्ष्य रखा है। योजना में स्थानीय युवाओं और ग्रामीण समुदायों की भागीदारी को विशेष महत्व दिया गया है।

नई ईको-टूरिज्म साइट्स पर उपलब्ध रोजगार में 80 प्रतिशत हिस्सेदारी स्थानीय हिमाचली युवाओं के लिए सुनिश्चित करना अनिवार्य किया गया है। योजना को प्रभावी तरीके से लागू करने के उद्देश्य से धर्मशाला कॉलेज के सभागार में वन विभाग की ओर से तीन दिवसीय कार्यशाला आयोजित की जा रही है।

कार्यशाला में ईको-टूरिज्म सोसायटी के सीईओ एवं आईएफएस अधिकारी के. तिरुमल ने विभाग की आगामी रणनीति और विजन की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि फिलहाल प्रदेश में ईको-टूरिज्म से लगभग 15 करोड़ रुपये का वार्षिक राजस्व प्राप्त हो रहा है। विभाग की योजना इस आय को अगले एक साल में बढ़ाकर 55 करोड़ रुपये करने की है। इसके लिए शिमला, धर्मशाला समेत अलग-अलग वन सर्किलों के लिए राजस्व और विकास से जुड़े लक्ष्य तय किए गए हैं।

ईको-टूरिज्म गतिविधियों का दायरा बढ़ाने के लिए प्रदेश में 26 नई साइट्स विकसित की जा रही हैं। इनमें 17 साइट्स का आवंटन ऑपरेटरों को किया जा चुका है, जबकि बाकी नौ साइट्स के संबंध में निर्णय होना अभी बाकी है। सभी प्रस्तावित साइट्स के संचालन में आने के बाद सरकार को करीब 8.5 करोड़ रुपये का अतिरिक्त सालाना राजस्व मिलने की उम्मीद है।

75 वन विश्राम गृहों को स्थानीय स्तर पर देने की तैयारी

वन विभाग की योजना ईको-टूरिज्म से होने वाले आर्थिक लाभ को केवल प्रमुख पर्यटन स्थलों तक सीमित रखने की नहीं है। इसके जरिए गांवों और पंचायतों तक रोजगार तथा आय के अवसर पहुंचाने पर भी जोर दिया जा रहा है। इसी उद्देश्य से 75 वन विश्राम गृहों को स्थानीय लोगों की भागीदारी के साथ संचालित करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।

इस पहल के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर पैदा करने की कोशिश की जा रही है।

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