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बडलठौर मां बगलामुखी धाम: प्राचीन पिंडियों के दर्शन

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हिमाचल में आस्था का प्रमुख केंद्र है मां बगलामुखी धाम, प्राचीन पिंडियां बनीं आकर्षण

देवभूमि हिमाचल प्रदेश में कई ऐसे धार्मिक स्थल हैं, जहां श्रद्धालु आध्यात्मिक शांति और आस्था का अनुभव करने पहुंचते हैं। कांगड़ा जिले के देहरा उपमंडल के बडलठौर गांव में स्थित मां बगलामुखी मंदिर भी ऐसा ही एक प्रमुख धार्मिक स्थल है। मंदिर अपनी भव्यता के साथ यहां मौजूद प्राचीन पिंडियों और उनसे जुड़ी धार्मिक मान्यताओं के कारण श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है।

मंदिर से जुड़ी मान्यता के मुताबिक, यहां निर्माण कार्य के दौरान धरती के भीतर से प्राचीन मंदिर के अवशेषों जैसे धार्मिक स्वरूप और कई पवित्र पिंडियां सामने आई थीं। श्रद्धालु इन पिंडियों को सतयुग से संबंधित धार्मिक धरोहर के रूप में मानते हैं। मंदिर के निर्माण की शुरुआत वर्ष 2008 में हुई थी। मंदिर प्रबंधन से जुड़े मनोहर लाल शर्मा के अनुसार, निर्माण के दौरान सामने आए इन धार्मिक स्वरूपों के बाद इस स्थान के प्रति लोगों की आस्था और अधिक गहरी हुई।

वर्तमान में मंदिर परिसर करीब 15 कनाल क्षेत्र में फैला हुआ है। यहां नियमित रूप से धार्मिक गतिविधियां होती हैं और बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

एक ही परिसर में कई देवी-देवताओं की पिंडियां

बडलठौर धाम की प्रमुख विशेषताओं में यहां स्थापित विभिन्न पवित्र पिंडियां शामिल हैं। मंदिर प्रबंधन के अनुसार परिसर में मां बगलामुखी, मां अंबिका, नागेश्वर महादेव, भगवान विष्णु, गणपति और भैरव की पिंडियां विराजमान हैं।

इसके साथ ही 12 ज्योतिर्लिंगों तथा भगवान विष्णु के अलग-अलग अवतारों से जुड़ी पिंडियों को लेकर भी धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। इन सभी पिंडियों के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की इनसे गहरी धार्मिक आस्था जुड़ी हुई है।

मां बगलामुखी की तीन मुखी प्राचीन पिंडी

मंदिर के महाप्रबंधक पंडित मनोहर लाल शर्मा के अनुसार, बडलठौर धाम में मां बगलामुखी की तीन मुखी प्राचीन पिंडी विराजमान होने की मान्यता है। यही प्राचीन पिंडी मंदिर की धार्मिक पहचान और श्रद्धालुओं के आकर्षण का एक प्रमुख कारण मानी जाती है।

धार्मिक मान्यताओं और प्राचीन पिंडियों के दर्शन के लिए बडलठौर स्थित यह धाम लगातार श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है।

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