2015 भूकंप से कमजोर हुआ था लांगटांग ग्लेशियर
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2015 के भूकंप से कमजोर हुआ था लांगटांग ग्लेशियर, आईआईटी मंडी के शोध में सामने आया अहम दावा
नेपाल में आई हालिया त्रासदी को लेकर आईआईटी मंडी के एक शोध में महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। शोधकर्ताओं के अनुसार, इस घटना की कड़ी अप्रैल 2015 में आए 7.9 तीव्रता वाले गोरखा भूकंप से जुड़ी हो सकती है। शोध का दावा है कि उस भूकंप के बाद लांगटांग ग्लेशियर की संरचना कमजोर और अस्थिर हो गई थी।
आईआईटी मंडी के स्कूल ऑफ सिविल एंड एनवायरनमेंटल इंजीनियरिंग के शोधकर्ताओं ने सैटेलाइट तस्वीरों का अध्ययन किया। इसके आधार पर उनका कहना है कि ग्लेशियर के टूटने की प्रमुख वजह जलवायु परिवर्तन या मानव गतिविधियां नहीं, बल्कि वर्षों पहले आया भूकंप हो सकता है।
शोध के मुताबिक, 2015 के भूकंप के बाद लांगटांग और टाबो ग्लेशियरों की स्थिरता प्रभावित हुई थी। लांगटांग ग्लेशियर का एक बड़ा हिस्सा धीरे-धीरे ऐसी स्थिति में पहुंच गया, जिसे शोधकर्ताओं ने ‘हैंगिंग ग्लेशियर’ के रूप में चिन्हित किया। इसी अस्थिरता को मौजूदा घटना से जोड़कर देखा जा रहा है।
शोधकर्ताओं के अनुसार, 2015 के भूकंप के दौरान लांगटांग ग्लेशियर के दक्षिणी हिस्से में भी बड़े पैमाने पर टूटने की घटना हुई थी, जिसके दौरान दो गांवों का अस्तित्व प्रभावित हुआ था। अब ग्लेशियर के उत्तरी हिस्से के टूटने को नेपाल में हुई नई त्रासदी से जोड़ा जा रहा है।
आईआईटी मंडी के स्कूल ऑफ सिविल एंड एनवायरनमेंटल इंजीनियरिंग से जुड़े प्रोफेसर डेरिक्स प्रेज शुक्ला का कहना है कि लांगटांग ग्लेशियर के गिरने के पीछे अप्रैल 2015 का गोरखा भूकंप एक अहम कारण रहा है।
शोधकर्ताओं ने यह भी तर्क दिया है कि यदि मौजूदा घटना का मुख्य कारण केवल जलवायु परिवर्तन होता, तो आसपास के अन्य हिमालयी ग्लेशियरों में भी इसी तरह के बदलाव देखने को मिलते। उनके अध्ययन में ऐसा समान प्रभाव दिखाई नहीं दिया। इसलिए उनका निष्कर्ष है कि लांगटांग ग्लेशियर भूकंप के बाद से ही कमजोर और अस्थिर स्थिति में था और लंबे समय बाद उसकी यह अस्थिरता एक बड़ी घटना में बदल गई।
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