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गणेश चतुर्थी 2026: पूजा मुहूर्त और शुभ योग

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गणेश चतुर्थी 2026: पूजा का शुभ मुहूर्त, शुभ योग और चंद्र दर्शन से जुड़ी मान्यता

गणेश चतुर्थी भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाने वाला प्रमुख हिंदू पर्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मध्याह्न काल में भगवान गणेश का प्राकट्य हुआ था। इसी मान्यता के चलते इस दिन घरों और सार्वजनिक स्थानों पर गणपति की प्रतिमा स्थापित कर विधिपूर्वक पूजा की जाती है।

जवाली के ज्योतिषी पंडित विपन शर्मा के अनुसार, पंचांग में भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 14 सितंबर 2026 को सुबह 7:07 बजे शुरू होगी और 15 सितंबर को सुबह 7:43 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि के आधार पर गणेश चतुर्थी का पर्व 14 सितंबर 2026 को मनाया जाएगा।

गणेश चतुर्थी पर बनेंगे ये शुभ योग

इस वर्ष गणेश चतुर्थी के दिन कई शुभ योगों का संयोग बन रहा है। ज्योतिषी के अनुसार, रवि योग, इंद्र योग और ब्रह्म योग का निर्माण होगा। धार्मिक मान्यता है कि ऐसे शुभ योगों में भगवान गणेश की आराधना करने से पूजा का विशेष फल प्राप्त होता है।

इसी दिन से गणेश उत्सव के 10 दिवसीय आयोजन की शुरुआत भी होगी। यह उत्सव अनंत चतुर्दशी तक जारी रहेगा, जब गणपति विसर्जन के साथ उत्सव का समापन किया जाता है।

गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त

गणेश प्रतिमा की स्थापना और पूजा के लिए मध्याह्न काल को विशेष रूप से शुभ माना जाता है। 14 सितंबर 2026 को सुबह 11:21 बजे से दोपहर 1:48 बजे तक गणपति स्थापना और पूजा का उत्तम मुहूर्त रहेगा।

भक्त इस अवधि में भगवान गणेश की प्रतिमा को घर में स्थापित करके विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर सकते हैं।

गणेश चतुर्थी को क्यों कहा जाता है ‘कलंक चतुर्थी’?

गणेश चतुर्थी को ‘कलंक चतुर्थी’ के नाम से भी जाना जाता है। इसके पीछे चंद्र दर्शन से जुड़ी धार्मिक मान्यता बताई जाती है।

मान्यता के अनुसार, गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा को देखना निषिद्ध माना गया है। कहा जाता है कि इस दिन चंद्र दर्शन करने वाले व्यक्ति पर मिथ्या आरोप या लांछन लग सकता है। इसलिए श्रद्धालुओं को गणेश चतुर्थी की रात चंद्रमा के दर्शन से बचने की सलाह दी जाती है।

चंद्र दर्शन का निषेध

धार्मिक परंपरा में गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा देखने से विशेष रूप से बचने की मान्यता है। इसी कारण इस तिथि को ‘कलंक चतुर्थी’ भी कहा जाता है। भक्त इस दिन भगवान गणेश की पूजा और आराधना पर विशेष ध्यान देते हैं।

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