जमीन फर्जीवाड़े में प्रॉपर्टी डीलर को जमानत, परिजनों की बढ़ी चिंता
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सरकारी जमीन और राजस्व रिकॉर्ड में कथित हेरफेर से जुड़े मामले में आरोपी प्रॉपर्टी डीलर नेक राम को शनिवार को अदालत से जमानत मिल गई। हालांकि, मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ उसके परिवार और करीबियों पर भी गिरफ्तारी का खतरा बना हुआ है। नेक राम की माता, पत्नी और चालक ने संभावित गिरफ्तारी से राहत पाने के लिए अदालत में अग्रिम जमानत की याचिकाएं दाखिल की हैं।
विजिलेंस विभाग के अनुसार, नेक राम पर आरोप है कि उसने राजस्व विभाग के कुछ अधिकारियों के साथ कथित मिलीभगत कर फर्जी दस्तावेजों के जरिए जमीनों की खरीद-फरोख्त का नेटवर्क तैयार किया। जांच में पिछले करीब 15 वर्षों के दौरान 13 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की संपत्तियों के कथित अवैध लेन-देन से जुड़ी जानकारी सामने आने की बात कही जा रही है। विभाग ने आरोपी से पिछले तीन-चार दिनों तक पूछताछ भी की थी।
यह मामला जनवरी 2026 में विजिलेंस के समक्ष दर्ज किया गया था। जांच के दौरान वर्ष 1981 में आवंटित एक नौतोड़ जमीन को कथित तौर पर फर्जी तरीके से नेक राम के नाम करवाने का मामला भी सामने आया। अधिकारियों के साथ कथित सांठगांठ के जरिए जमीनों से संबंधित बड़े स्तर पर अनियमितताएं किए जाने के आरोपों की भी पड़ताल की जा रही है।
शनिवार को अदालत से नेक राम को राहत मिलने के बावजूद जांच की दिशा अब उसके परिवार के अन्य सदस्यों और करीबियों तक पहुंचती दिखाई दे रही है। इसी आशंका के चलते उसकी माता, पत्नी और चालक ने अग्रिम जमानत के लिए अदालत का रुख किया है।
उधर, नेक राम के खिलाफ मामला दर्ज होने के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। एक भाजपा नेता के साथ उसके जमीन संबंधी कथित जुड़ाव को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं सामने आई हैं। हालांकि, विभागीय अधिकारियों का कहना है कि नेक राम से जुड़ा मामला और भाजपा नेता से संबंधित मामला अलग-अलग हैं और दोनों को एक ही प्रकरण के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
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