हिमाचल की जेलों में 30% ओवरक्राउडिंग
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हिमाचल की जेलों में बढ़ा कैदियों का दबाव, क्षमता से 30% अधिक बंदी
हिमाचल प्रदेश की जेलों में कैदियों की बढ़ती संख्या अब बड़ी चिंता का विषय बनती जा रही है। प्रदेश की 14 जेलों में कुल 2,580 कैदियों को रखने की स्वीकृत क्षमता है, लेकिन वर्तमान में यहां 3,355 बंदी मौजूद हैं। इस तरह जेलों में निर्धारित क्षमता से 775 अधिक कैदी रह रहे हैं, जो कुल क्षमता का लगभग 30 प्रतिशत अतिरिक्त है।
जेलों में बंद कैदियों में 1,113 सजायाफ्ता कैदी हैं, जबकि 2,203 विचाराधीन बंदी हैं। इसके अलावा 39 नागरिक अथवा एहतियाती हिरासत में रखे गए लोग भी जेलों में मौजूद हैं।
कैदियों की बढ़ती संख्या के बीच प्रदेश में नई और आधुनिक जेलों के निर्माण की योजना भी जमीन उपलब्ध न होने के कारण आगे नहीं बढ़ पा रही है। करीब डेढ़ वर्ष पहले केंद्र सरकार की ओर से हिमाचल प्रदेश में 15 नई अत्याधुनिक जेलें स्थापित करने का प्रस्ताव सामने आया था। इन जेलों को सुधार गृह की तर्ज पर विकसित करने की योजना थी और प्रत्येक जेल के लिए लगभग 150 कनाल भूमि की जरूरत बताई गई थी।
योजना के तहत राज्य सरकार को जमीन चिन्हित कर उसका प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजना था। भूमि का चयन और अंतिम रूप दिए जाने के बाद निर्माण के लिए केंद्र से वित्तीय सहायता मिलने की प्रक्रिया शुरू होनी थी। हालांकि, अब तक इस दिशा में अपेक्षित प्रगति नहीं हो सकी है।
कांगड़ा जिले के देहरा-परागपुर क्षेत्र में भी करीब 150 कनाल भूमि पर आधुनिक जेल बनाने की योजना प्रस्तावित है। लेकिन जमीन का चयन और उसे अंतिम रूप देने की प्रक्रिया अभी लंबित है। देहरा में भूमि तय होने के बाद ही केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजने और निर्माण के लिए बजट हासिल करने की प्रक्रिया आगे बढ़ पाएगी।
जेलों में क्षमता से अधिक कैदियों का मुद्दा अब हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के संज्ञान में भी आ चुका है। मामले में अदालत ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है। इस प्रकरण की अगली सुनवाई 18 सितंबर को निर्धारित है।
ऐसे में प्रदेश सरकार के सामने एक ओर मौजूदा जेलों में बढ़ते कैदियों के दबाव को संभालने की चुनौती है, तो दूसरी ओर प्रस्तावित नई जेल परियोजनाओं के लिए उपयुक्त भूमि उपलब्ध कराना भी जरूरी हो गया है।
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