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1971 में बलिदान सेना का मगर आयरन लेडी का तमग़ा किसी और को: अनुराग सिंह ठाकुर 

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प्रेस विज्ञप्ति

 

1971 में बलिदान सेना का मगर आयरन लेडी का तमग़ा किसी और को: अनुराग सिंह ठाकुर

 

निक्सन को लिखी चिट्ठी में आख़िर इंदिरा जी एक याचक की तरह क्यों गिड़गिड़ाईंः अनुराग सिंह ठाकुर

 

30 जुलाई 2025, नई दिल्ली/ हिमाचल प्रदेश: पूर्व केंद्रीय मंत्री व हमीरपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद श्री अनुराग सिंह ठाकुर ने आज बुधवार को संसद में चर्चा के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी की तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति निक्सन को लिखी चिट्ठी पर सवाल उठाते हुए कहा कि आख़िर इंदिरा जी को अमेरिकी राष्ट्रपति के सामने गिड़गिड़ाने की ज़रूरत क्यों पड़ी व 1971 की लड़ाई में बलिदान तो भारतीय सेना ने दिया मगर आयरन लेडी का तमग़ा किसी और को क्यों मिला?

 

श्री अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा “ यदि 1971 के युद्ध की बात की जाए, तो बलिदान भारत की सेना ने दिया था लेकिन ‘आयरन लेडी’ किसी और को घोषित कर दिया गया। जो जंग सेना ने मैदान में जीती थी, वह इंदिरा गांधी मेज पर हारी गईं। यह देश तय करे कि उस समय की सरकार ‘आयरन’ थी कि ‘आयरनी’ (विडंबना) थी। तीन दिसंबर 1971 को पाकिस्तान द्वारा भारत के पश्चिमी मोर्चों पर हमले किये जाने के बाद 5 दिसंबर को इंदिरा गांधी ने निक्सन को चिट्ठी लिखी थी, मगर अमेरिकी राष्ट्रपति निक्सन को लिखी चिट्ठी में आख़िर इंदिरा जी एक याचक की तरह क्यों गिड़गिड़ा रही थीं? तत्कालीन प्रधानमंत्री ने अमेरिकी राष्ट्रपति से पाकिस्तान पर अपने प्रभाव का प्रयोग करने और भारत के विरूद्ध उसकी आक्रामक गतिविधियों को रोकने का आग्रह भारत को शर्मिंदा करते हुए आख़िर इतने हल्के शब्दों में क्यों किया था? क्या इंदिरा जी को उस समय भारत की सेना पर विश्वास नहीं था या अपनी सरकार पर विश्वास नहीं था, ‘जो अमेरिका के राष्ट्रपति के सामने हाथ फैलाना पड़ा?

 

 

श्री अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा “ कांग्रेस पार्टी देश को जबाब दे कि आख़िर यह चिट्ठी क्यों लिखी गई थी? राष्ट्रपति निक्सन को लिखे अपने पत्र में इंदिरा जी ने लिखा था” सरकार और भारत की जनता आपसे आग्रह करती है कि आप पाकिस्तान को उस अनियंत्रित आक्रामकता और सैन्य दुस्साहस की नीति से तुरंत बाज आने के लिए राजी करें, जिस पर वह दुर्भाग्य से चल पड़ा है। क्या मैं महामहिम से अनुरोध कर सकती हूं कि आप पाकिस्तान सरकार पर अपने प्रभाव का प्रयोग करके भारत के विरुद्ध उनकी आक्रामक गतिविधियों को रोकें। भारत उम्मीद करता है कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय हमारी दुर्दशा को समझेगा और हमारे उद्देश्य की न्यायसंगतता को स्वीकार करेगा”

 

श्री अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा “इंदिरा गांधी ने दीनहीन भाषा में पत्र लिखकर कौन सा दम दिखाया था जबकि यह बात सभी जानते है कि तत्कालीन अमरीकी राष्ट्रपति को भारत से नफ़रत थी और अमेरिका पहले से ही पाकिस्तान के पक्ष में भारत के विरोध में था तब भी इंदिरा गांधी ने निक्सन को ऐसे याचक की तरह पत्र क्यों लिखा? दरअसल नेहरु-गांधी परिवार झुकने और दण्डवत होने में माहिर है। यह पत्र न केवल प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की युद्ध के प्रति अनिच्छा की पुष्टि करता है, बल्कि तत्कालीन सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी की पाकिस्तान से निपटने के लिए अमेरिका पर निर्भरता को भी उजागर करता है”

 

श्री अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा “ ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष ने कई हल्की बातें कहीं जिसमें उन्होंने 50% दम दिखाने की बात कही। मैं कहना चाहता हूँ कि शून्य का 50% भी शून्य ही होता है और उस युद्ध में आपका योगदान शून्य ही था।

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