जुखाला–शालुघाट सड़क की बदहाली पर उठी आवाज
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जुखाला–शालुघाट सड़क की खराब हालत पर स्थानीय लोगों की आवाज बुलंद, अल्ट्राटेक ने गठित की कमेटी
जुखाला। जब्बल पुल से रानीकोटला, साई खारसी होते हुए शालुघाट तक जाने वाली सड़क की खस्ताहाल स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों और टावर लाइन शोषित जागरूकता मंच ने आवाज उठाई है। लोगों का कहना है कि सड़क की खराब हालत के कारण रोजमर्रा के आवागमन के साथ-साथ विद्यार्थियों और वाहन चालकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार सड़क पर कई स्थानों पर गड्ढे और क्षतिग्रस्त हिस्से हैं। बारिश के दौरान पानी सड़क पर बहने से स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो जाती है। ग्रामीणों ने सड़क की स्थिति को देखते हुए दुर्घटनाओं की आशंका भी जताई है।
मामले को लेकर स्थानीय लोगों और मंच की ओर से अल्ट्राटेक सीमेंट कंपनी के समक्ष सड़क समेत अन्य जनसमस्याएं रखी गईं। इसके बाद कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।
समस्याओं के समाधान के लिए कमेटी
स्थानीय लोगों की ओर से प्रस्तुत मांगों और समस्याओं की सूची पर कंपनी द्वारा एक कमेटी बनाए जाने की जानकारी सामने आई है। इसके बाद कंपनी के अधिकारियों ने संबंधित सड़क का मौके पर निरीक्षण किया।
अधिकारियों ने जुखाला–जब्बल पुल से रानीकोटला और साई खारसी होते हुए शालुघाट तक सड़क की स्थिति देखी तथा स्थानीय लोगों से बातचीत कर उनकी समस्याओं की जानकारी ली। अब लोगों को उम्मीद है कि निरीक्षण के आधार पर सड़क की कमियों का आकलन कर सुधार कार्य शुरू किए जाएंगे।
स्थानीय विकास और सामाजिक उत्तरदायित्व के खर्च पर सवाल
टावर लाइन शोषित जागरूकता मंच के राष्ट्रीय संयोजक रजनीश शर्मा ने कंपनी की ओर से स्थानीय विकास और सामाजिक उत्तरदायित्व के अंतर्गत किए जाने वाले खर्च को लेकर पारदर्शिता का मुद्दा उठाया।
उन्होंने कहा कि औद्योगिक गतिविधियों वाले क्षेत्रों में स्थानीय निवासियों की सड़क, सुरक्षा, यातायात और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी जरूरतों पर ध्यान दिया जाना जरूरी है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि स्थानीय विकास और सामाजिक उत्तरदायित्व के लिए निर्धारित धनराशि का कितना हिस्सा किन कार्यों में लगाया गया है और उसका वास्तविक लाभ क्षेत्र के लोगों को किस स्तर तक मिला है।
रजनीश शर्मा ने मांग की कि कंपनी यह जानकारी सार्वजनिक करे कि स्थानीय विकास और सामाजिक उत्तरदायित्व के लिए कितनी धनराशि स्वीकृत हुई, किन योजनाओं या कार्यों पर उसका इस्तेमाल किया गया और संबंधित कार्यों की मौजूदा स्थिति क्या है।
उन्होंने कंपनी प्रबंधन से स्थानीय लोगों की ओर से दी गई समस्याओं की सूची के आधार पर समयबद्ध योजना तैयार करने, सड़क की हालत सुधारने तथा स्थानीय विकास एवं सामाजिक उत्तरदायित्व से जुड़े कार्यों और उनके खर्च का विवरण सार्वजनिक करने की मांग की।
स्थानीय लोगों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी कंपनी का केवल विरोध करना नहीं, बल्कि क्षेत्र की लंबे समय से चली आ रही समस्याओं का व्यावहारिक और स्थायी समाधान करवाना है। अब उनकी नजर कंपनी अधिकारियों के निरीक्षण के बाद होने वाली कार्रवाई पर है।
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