तीन माह में 2,000 सीबीएसई शिक्षकों की नियुक्ति का लक्ष्य: मुख्यमंत्री सुक्खू
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अर्की, 19 सितंबर 2026: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने सोलन जिले के अर्की में आयोजित राज्य स्तरीय सायर मेले के समापन समारोह में प्रदेश में शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और भ्रष्टाचार नियंत्रण से जुड़े सरकार के प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने घोषणा की कि प्रदेश के सीबीएसई स्कूलों में अगले तीन महीनों के दौरान 2,000 और शिक्षकों की नियुक्तियां की जाएंगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ माह पहले सरकार द्वारा प्रदेश में 150 सीबीएसई स्कूल शुरू करने की घोषणा के समय इसका विरोध भी हुआ था। उन्होंने कहा कि इन विद्यालयों में शिक्षकों का चयन योग्यता के आधार पर किया जा रहा है और किसी प्रकार की सिफारिश को आधार नहीं बनाया जा रहा। उनके अनुसार प्रत्येक सीबीएसई स्कूल में पहले ही पांच से आठ शिक्षकों की नियुक्ति हो चुकी है और बाकी रिक्तियां भी जल्द भरी जाएंगी।
उन्होंने कहा कि निजी विद्यालयों में सीबीएसई शिक्षा की लागत अधिक है। सरकार का प्रयास है कि सरकारी स्कूलों में भी अपेक्षाकृत कम खर्च पर इसी स्तर की शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षा के साथ स्वास्थ्य क्षेत्र में भी सुधार के लिए काम कर रही है। उन्होंने बताया कि मेडिकल कॉलेजों में लंबे समय से इस्तेमाल हो रहे 15 से 19 वर्ष पुराने उपकरणों की जगह एम्स, नई दिल्ली की तर्ज पर आधुनिक मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं। जांच सुविधाओं को बेहतर बनाने के साथ चिकित्सकों की भर्ती भी की जा रही है।
उन्होंने कहा कि अर्की में भी जल्द विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। विधानसभा क्षेत्रों में स्थापित आदर्श स्वास्थ्य संस्थानों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति की जा रही है।
मुख्यमंत्री के अनुसार हाल में 200 चिकित्सकों की भर्ती की गई है, जबकि 228 अन्य चिकित्सकों की भर्ती शीघ्र की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में हिमाचल प्रदेश को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करना है।
किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर फोकस
ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकार कई कदम उठा रही है। दूध के खरीद मूल्य में वृद्धि के साथ अदरक को भी न्यूनतम समर्थन मूल्य की व्यवस्था में शामिल किया गया है।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के साथ किसानों को सीधे आर्थिक लाभ देना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
किशाऊ परियोजना पर राज्य के हितों का हवाला
मुख्यमंत्री ने किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना से जुड़े समझौते का उल्लेख करते हुए कहा कि यह समझौता ऐसे समय हुआ, जब दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में भविष्य में पानी की कमी की आशंका व्यक्त की जा रही थी।
उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने समझौते में पहले से निर्धारित शर्तों को स्वीकार किया था। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि यदि भाजपा सरकार सत्ता में होती तो हिमाचल प्रदेश पर 3,000 से 5,000 करोड़ रुपये तक का अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ सकता था और राज्य 1,200 से 1,500 करोड़ रुपये की संभावित सालाना आय से भी वंचित हो सकता था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका मत है कि जिन राज्यों को पानी की आवश्यकता है, उन्हें ही संबंधित विद्युत परियोजना की लागत का वहन करना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि हिमाचल प्रदेश के लोगों के सहयोग से राज्य के हितों को ध्यान में रखते हुए समझौते की शर्तें तय की गईं। उन्होंने यह भी कहा कि उत्तराखंड ने इसी तरह की व्यवस्था की मांग की थी, लेकिन उसे यह समझौता नहीं मिल सका।
भ्रष्टाचार पर कार्रवाई और 3,000 करोड़ रुपये की बचत का दावा
मुख्यमंत्री ने पिछली भाजपा सरकार के कार्यकाल को लेकर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए। उन्होंने कहा कि बद्दी, बरोटीवाला और नालागढ़ क्षेत्र में करीब 5,000 बीघा जमीन कुछ उद्योगपतियों को बिना पंजीकरण शुल्क के आवंटित की गई थी, लेकिन वहां अब तक उद्योग स्थापित नहीं हुए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसे आवंटनों को रद्द करने के विकल्प पर विचार कर रही है।
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि उनके कार्यकाल में भ्रष्टाचार पर नियंत्रण के कारण लगभग 3,000 करोड़ रुपये की बचत हुई है। उनके अनुसार इन संसाधनों को विधवाओं, बच्चों और अन्य जरूरतमंद वर्गों के लिए संचालित कल्याणकारी योजनाओं में लगाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार से अर्जित संपत्तियों की जांच जारी है। यदि जांच में संपत्ति के अवैध तरीके से अर्जित होने की पुष्टि होती है, तो उसे जब्त कर जरूरतमंद लोगों के कल्याण के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की मुहिम में जनता से सहयोग करने की अपील भी की।
अर्की क्षेत्र के लिए कई घोषणाएं
मुख्यमंत्री ने दिग्गल, भूमती और जय नगर के स्कूलों को सीबीएसई स्कूलों में बदलने की घोषणा की। साथ ही कुनिहार-सारमा, मांगू-मलावण, जाबल-जय नगर, भूमती-डाडल-पिपलूघाट और कोहू-भियूंकरी वाया सौर सड़कों की मरम्मत के लिए धन उपलब्ध कराने की बात कही।
विधायक संजय अवस्थी की मांग पर उन्होंने अर्की में कौशल विकास केंद्र खोलने के प्रस्ताव पर सकारात्मक रूप से विचार करने का आश्वासन दिया। उन्होंने शिमला-धैना बस सेवा दोबारा शुरू करने की घोषणा भी की।
इससे पहले ट्रांसपोर्टरों के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर अपनी मांगें रखीं। मुख्यमंत्री ने उनकी जायज मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का आश्वासन दिया।
कार्यक्रम से पहले मुख्यमंत्री ने काली माता मंदिर में पूजा-अर्चना की और प्रदेशवासियों की शांति तथा समृद्धि के लिए प्रार्थना की।
सायर मेले की 388 वर्ष पुरानी परंपरा
विधायक संजय अवस्थी ने कहा कि अर्की का सायर मेला ऐतिहासिक महत्व रखता है और इसकी परंपरा करीब 388 वर्षों से चली आ रही है। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में अर्की क्षेत्र में कई विकास कार्य हुए हैं और मुख्यमंत्री ने स्थानीय लोगों की विभिन्न मांगों को पूरा किया है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार राज्य के हितों की रक्षा के लिए काम कर रही है तथा प्रभावी प्रबंधन के माध्यम से विकास कार्यों को आगे बढ़ाया गया है। उनके अनुसार सरकार को प्राकृतिक आपदाओं के साथ राजनीतिक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा, लेकिन हिमाचल प्रदेश आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
समारोह में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल, विधायक विनोद सुल्तानपुरी और हरदीप सिंह बावा, विभिन्न बोर्ड एवं निगमों के अध्यक्ष-उपाध्यक्ष, पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधि, सोलन जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुभाष वर्माणी, उपायुक्त मनमोहन शर्मा सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
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