विश्वविद्यालय स्तर पर होगी प्रोफेसर भर्ती
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विश्वविद्यालयों में प्रोफेसर भर्ती विश्वविद्यालय स्तर पर, संशोधन विधेयक विधानसभा में पारित
हिमाचल प्रदेश के विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर राज्य सरकार ने व्यवस्था में बदलाव किया है। अब प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर के पदों पर भर्ती विश्वविद्यालय अपने स्तर पर करेंगे, जबकि अन्य गैर-शैक्षणिक पदों की नियुक्तियां लोक सेवा आयोग और राज्य चयन आयोग के माध्यम से की जाएंगी।
विश्वविद्यालयों की शैक्षणिक स्वतंत्रता बनाए रखते हुए भर्ती प्रक्रिया और वित्तीय प्रबंधन में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से राज्य विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक विधानसभा में पेश किया गया। बुधवार को करीब 75 मिनट की चर्चा के बाद सदन ने इसे पारित कर दिया। विधेयक पर बहस के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली।
विपक्ष ने विधेयक को जल्दबाजी में पारित नहीं करने की मांग की। विपक्षी सदस्यों का कहना था कि पूर्व में विश्वविद्यालयों से जुड़े कुछ मामले न्यायालय तक पहुंचे हैं और इस नए प्रावधान को भी हाई कोर्ट में चुनौती मिलने की संभावना है।
विधेयक पर सरकार की ओर से जवाब देते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि सरकार विश्वविद्यालयों की अकादमिक स्वायत्तता में दखल देने के पक्ष में नहीं है। उनका कहना था कि प्रस्तावित व्यवस्था का मकसद नियुक्तियों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि शैक्षणिक विषयों पर सरकार का हस्तक्षेप नहीं होगा और शिक्षकों की नियुक्तियां विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के निर्धारित नियमों के अनुरूप ही की जाएंगी।
उन्होंने बताया कि सहायक प्रोफेसर के पदों के लिए NET और SET जैसी निर्धारित पात्रता रखने वाले उम्मीदवारों को लिखित परीक्षा के जरिए चयन प्रक्रिया में आगे बढ़ने का मौका मिलेगा। इसके बाद साक्षात्कार के लिए 20 अंक निर्धारित रहेंगे। वहीं, एसोसिएट प्रोफेसर की नियुक्ति का अधिकार संबंधित विश्वविद्यालय के पास रहेगा।
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