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बागवानी क्षेत्र में सहकारी समितियों का मज़बूत नेटवर्क होगा तैयार – जगत सिंह नेगी

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सोलन     दिनांक 16.01.2026

 

बागवानी क्षेत्र में सहकारी समितियों का मज़बूत नेटवर्क होगा तैयार – जगत सिंह नेगी

फील्ड तक पहुंचेगें बागवनी विभाग के अधिकारी और नौणी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक

नौणी विश्वविद्यालय में अल्टरनेरिया और मार्सोनिना पत्ता धब्बा रोग पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित

 

राजस्व, बागवानी एवं जनजातीय विकास मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि प्रदेश में बागवानी क्षेत्र में उत्पाद विपणन प्रणाली को ओर सुदृढ़ करने के लिए सहकारी समितियों का मज़बूत नेटवर्क तैयार किया जाएगा। जगत सिंह नेगी आज सोलन ज़िला के नौणी स्थित डॉ. वाई.एस. परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय में सेब में अल्टरनेरिया और मार्सोनिना पत्ता धब्बा रोग के कारण उपचारात्मक रणनीतियों पर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला को सम्बोधित कर रहे थे।

जगत सिंह नेगी ने कहा कि सहकारिता के माध्यम से न केवल उत्पाद का बेहतर मूल्य प्राप्त किया जा सकता है अपितु विपणन अधोसंरचना को गांव-गांव तक पहुंचाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि भविष्य में सेब सहित अन्य फलों को विपणन की दृष्टि से अच्छा मंच उपलब्ध करवाने के लिए सहकारी समितियों का सुदृढ़ीकरण आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सहकारी समितियों की कार्य प्रणाली में पारदर्शिता, बेहतर समन्वय तथा विश्वास बढ़ाया जाना आवश्यक है।

बागवानी मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार सेब सहित अन्य फलों के रोगों के समुचित प्रबंधन और उपचार के लिए अनेक स्तरों पर कार्य कर रही है। इस दिशा में नौणी विश्वविद्यालय की भूमिका सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने वैज्ञानिकों से आग्रह किया कि कीट प्रबंधन, रोग उपचार और भविष्य में रोग के प्रसार को न्यून करने के लिए डाटा संग्रहण और वैज्ञानिक निष्कर्ष को अत्यंत महत्वपूर्ण समझें। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक विश्लेषण ही प्रबंधन का मुख्य आधार होना चाहिए।

जगत सिंह नेगी ने कहा कि प्रदेश सरकार बागवानी को मिशन के रूप में कार्यान्वित कर रही है। यह प्रयास किया जा रहा है कि बागवानों का उत्पाद सही समय तक मण्डियों तक पहुंचे ताकि उन्हें उनकी फसल के बेहतर दाम मिलें। उन्होंने कहा कि इस दिशा में फसल को रोग से बचाकर रखना महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने वर्ष 2025 में मण्डी मध्यस्थता योजना के अंतर्गत लगभग 120 करोड़ रुपए का सेब बागवानों से क्रय किया है।

बागवानी मंत्री ने कहा कि रोग नियंत्रण एवं उपचार के लिए वैज्ञानिकों द्वारा दिए गए परामर्श एवं बागवानों के सुझावों को अपनाया जाएगा। बागवानी विभाग एवं नौणी विश्वविद्यालय परामर्श के उपरांत आवश्यकता आधारित कीटनाशक उपयोग के विषय में समयसारणी तैयार करने पर विचार करेंगे।

उन्होंने कहा कि बागवानी विभाग के अधिकारियों एवं नौणी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा प्रदेश में चरणबद्ध आधार पर एक-एक गांव को गोद लेकर वहां बागवानी से सम्बन्धित विभिन्न कार्यों की देख-रेख की जाएगी ताकि बेहतर परिणाम प्राप्त हो सकंे। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित बनाया जाएगा कि बागवानी विभाग के अधिकारी नियमित आधार पर गांव तक पहुंचें। विदेश से बागवानी के क्षेत्र में उच्च जानकारी प्राप्त कर आने वाले वैज्ञानिकों एवं अधिकारियों को भी नियमित आधार पर बागवानों तक पहुंचना होगा।

बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी नौणी विश्वविद्यालय को निर्देश दिए कि अपने यू ट्यूब चैनल की आउटरीच बढ़ाएं और यह प्रयास किया जाए कि यह चैनल विभिन्न फल रोगों के उपचार एवं रोग प्रबंधन पर पूर्ण जानकारी प्रदान करे।

जगत सिंह नेगी ने कहा कि आज की कार्यशाला में प्रस्तुत सुझावों और विचारों को कार्य योजना बनाकर अमलीजामा पहनाया जाएगा।

डॉ. यशवंत सिंह परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजेश्वर सिंह चंदेल ने विषय की सारगर्भित जानकारी प्रदान करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय शीघ्र ही विषय पर ऑनलाइन सत्र आरम्भ करेगा। आधा-आधा दिन के यह सत्र प्रत्येक 15 दिन में एक बार आयोजित किए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय, रोग प्रबंधन एवं निवारण पर प्रयोगशाला के अनुसंधान को बागवानों तक पहुंचाने के लिए नियमित प्रत्यनशील है। गत वर्ष 147 शिविरों के माध्यम से 90,000 बागवानों तक पहुंच सुनिश्चित बनाई गई है।

प्रदेश बागवानी विभाग के निदेशक विनय सिंह ने कहा कि मौसम में हो रहे बदलाव और अनिश्चित वर्षा समय ने कृषि एवं बागवानी क्षेत्र के लिए अनेक समस्याएं उत्पन्न की हैं। उन्होंने कहा कि बागवानी विभाग बागवानों को सुविधा प्रदान करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। वर्ष 2025 में मण्डी मध्यस्थता योजना के तहत 98,000 मीट्रिक टन सेब की खरीद की गई।

एच.पी.एम.सी के पूर्व उपाध्यक्ष प्रकाश ठाकुर ने वर्ष 1970 से प्रदेश में सेब रोग, रोग प्रबंधन एवं भविष्य की आवश्यकताओं पर जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया की सकारात्मक आउटरीच का लाभ उठाकर विशेषज्ञ जानकारी बागवानों तक पहुंचाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इन रोगों के कारण बागवानों और प्रदेश की आर्थिकी को करोड़ों रुपए का नुकसान हो रहा है।

कार्यशाला में विश्वविद्यालय के विषय विशेषज्ञों द्वारा समुचित जानकारी प्रदान की गई।

क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केन्द्र मशोबरा की कीट वैज्ञानिक डॉ. संगीता शर्मा ने सेब में माईट के प्रकार, बढ़ौतरी के कारण, निवारण और प्रबंधन विषय पर पूर्ण जानकारी प्रदान की। उन्होंने कहा कि माईट को पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है।

कार्यशाला में नौणी विश्वविद्यालय की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. शालिनी वर्मा, डॉ. नीलम कुमारी, क्षेत्रीय अनुसंधान केन्द्र रोहडू की वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. ऊषा शर्मा, बी.टी.एम. कटराईं, कुल्लू की नीजू राणा ने सारगर्भित जानकारी प्रदान की। प्रदेश के विभिन्न भागों से आए प्रगतिशील बागवानों ने विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किए।

कार्यशाला में वैज्ञानिकों एवं बागवानों ने स्पष्ट किया कि स्वस्थ मृदा ही स्वस्थ पौधा प्रदान कर सकती है और इन्हीं के माध्यम से बेहतर फसल प्राप्त की जा सकती है।

डॉ. वाई.एस. परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी की अनुसंधान निदेशक डॉ. देविना वैद्य, निदेशक विस्तार शिक्षा डॉ. इन्द्र देव सहित विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक, प्राध्यापक एवं प्रदेश के विभिन्न ज़िलों के आए प्रगतिशील बागवान तथा विभिन्न बागवानी सहकारी समितियों के अध्यक्ष इस अवसर पर उपस्थित थे।

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