एंटी-हेलगन के संचालन पर हाई कोर्ट ने लगाई एक साल की रोक
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हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने शिमला जिले के जुब्बल और कोटखाई इलाकों में इस्तेमाल हो रही एंटी-हेलगन (ओलावृष्टि रोकने वाली बंदूक) के संचालन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। अदालत ने यह पाबंदी सरकारी और निजी, दोनों तरह की एंटी-हेलगन पर लागू की है। रोक की अवधि कम से कम एक साल रखी गई है।
मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायमूर्ति बिपिन सी नेगी की खंडपीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान यह निर्देश जारी किया। मामले की अगली सुनवाई 8 दिसंबर 2026 को होगी।
याचिका से जुड़े दस्तावेजों और रिपोर्ट में आशंका जताई गई थी कि एंटी-हेलगन के संचालन के बाद बादल अपना रुख बदलकर आसपास के दूसरे क्षेत्रों की ओर जा सकते हैं। इसके चलते पड़ोसी इलाकों में अत्यधिक बारिश और ओलावृष्टि होने की बात कही गई, जिससे वहां के बागवानों की फसलों और बागों को नुकसान पहुंचने की चिंता सामने आई।
अदालत ने राज्य सरकार के पक्ष का भी उल्लेख किया। सरकार के अनुसार, देवरीघाट और बरेओंघाट में दो एंटी-हेलगन स्थापित हैं और इनके प्रभाव का वैज्ञानिक अध्ययन नौणी विश्वविद्यालय द्वारा किया जा रहा है। सरकार ने बताया कि इस अध्ययन से किसी ठोस निष्कर्ष तक पहुंचने में अभी कम से कम चार साल लग सकते हैं।
मामले को गंभीरता से लेते हुए हाई कोर्ट ने नौणी विश्वविद्यालय को भी पक्षकार बनाया है। अदालत ने विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार के माध्यम से नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है।
एक घंटे से ज्यादा चली गन के दौरान हुई तेज बारिश
सुनवाई के दौरान अदालत ने बागवानी निदेशक की ओर से प्रस्तुत हलफनामे का भी संज्ञान लिया। इसमें बताया गया कि एक अवसर पर ओलावृष्टि नियंत्रण प्रणाली को एक घंटे से अधिक समय तक चलाया गया और इसी अवधि के दौरान क्षेत्र में भारी बारिश दर्ज हुई।
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