हिमाचल कांग्रेस में अब काम नहीं तो पद नहीं
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दो बैठकों से गैरहाजिर रहे तो तीसरी में पद से छुट्टी, हिमाचल कांग्रेस में अब कामकाज पर होगी सख्त निगरानी
प्रदेश से ब्लॉक स्तर तक लागू होगी नई व्यवस्था, हर महीने के शुरुआती 10 दिनों में बैठक जरूरी
शिमला। हिमाचल प्रदेश कांग्रेस संगठन में अब निष्क्रिय पदाधिकारियों पर कार्रवाई की तैयारी है। पार्टी ने संगठन को अधिक सक्रिय और जवाबदेह बनाने के लिए ऐसा नियम तय किया है, जिसके तहत लगातार दो बैठकों से अनुपस्थित रहने वाले पदाधिकारी को तीसरी बैठक में जिम्मेदारी से हटाया जा सकता है। उसके स्थान पर किसी सक्रिय कार्यकर्ता को दायित्व सौंपा जाएगा।
यह व्यवस्था केवल ब्लॉक और जिला स्तर तक सीमित नहीं रहेगी। प्रदेश कांग्रेस के पदाधिकारी भी इसके दायरे में होंगे। यदि प्रदेश स्तर पर जिम्मेदारी संभाल रहा कोई नेता अपेक्षित रूप से काम नहीं करता है, तो उसके दायित्व में बदलाव किया जा सकता है। पार्टी का जोर अब पद के बजाय कार्यकर्ता की सक्रियता और जमीनी प्रदर्शन पर रहेगा।
पदाधिकारियों को दिए जाएंगे स्पष्ट टास्क
संगठन को मजबूत करने के लिए पदाधिकारियों की जिम्मेदारियां स्पष्ट की जाएंगी। उन्हें निर्धारित कार्य सौंपने के साथ उनकी प्रगति की निगरानी भी होगी। पार्टी का उद्देश्य ऐसे कार्यकर्ताओं को आगे लाना है, जो संगठन के लिए नियमित रूप से काम कर रहे हैं और जनता के बीच सक्रिय हैं।
प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष और कांगड़ा जिला प्रभारी सतपाल रायजादा के अनुसार, ब्लॉक स्तर पर होने वाली गतिविधियों की नियमित समीक्षा की जाएगी। इसके लिए जिला कमेटी के उपाध्यक्षों और सचिवों को अलग-अलग ब्लॉकों की जिम्मेदारी देने की व्यवस्था की जा रही है।
महीने के शुरुआती 10 दिनों में बैठक अनिवार्य
नई व्यवस्था के तहत ब्लॉक और जिला कांग्रेस की बैठकें प्रत्येक महीने के पहले 10 दिनों के दौरान आयोजित करना जरूरी होगा। इस प्रक्रिया को ब्लॉक स्तर तक लागू किया जाएगा, ताकि संगठनात्मक गतिविधियों की नियमित समीक्षा होती रहे और स्थानीय स्तर पर सामने आने वाली समस्याओं पर समय रहते काम किया जा सके।
2027 को ध्यान में रखकर भाजपा के खिलाफ जनसंपर्क की तैयारी
संगठन को सक्रिय करने के साथ कांग्रेस ने वर्ष 2027 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए राजनीतिक अभियान की दिशा भी तय की है। ब्लॉक कांग्रेस के कार्यकर्ता घर-घर संपर्क कर लोगों को पार्टी से जोड़ने का प्रयास करेंगे।
इस अभियान के दौरान कांग्रेस की ओर से आरडीजी, 1,500 करोड़ रुपये, एनपीएस के लंबित धन, पेपर लीक प्रकरण, मंदिरों के चढ़ावे और भाजपा की ओर से कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के शुद्धिकरण किए जाने जैसे मुद्दों को जनता के बीच उठाने की योजना है।
पार्टी की रणनीति संगठन में जवाबदेही बढ़ाने के साथ-साथ इन मुद्दों के जरिए भाजपा और केंद्र सरकार को राजनीतिक रूप से घेरने की है।
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