सिरमौर में फर्जी ITC नेटवर्क का खुलासा
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सिरमौर में कथित फर्जी ITC नेटवर्क का खुलासा, CGST शिमला की कार्रवाई
कालाअंब में फार्मा कंपनी के प्रबंध निदेशक की गिरफ्तारी, करीब 6.55 करोड़ रुपये के अपात्र ITC की जांच
सिरमौर के कालाअंब में केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (CGST) आयुक्तालय, शिमला के प्रिवेंटिव विंग ने कथित टैक्स चोरी और फर्जी बिलिंग से जुड़े एक मामले का खुलासा किया है। विभाग की जांच में करीब 6.55 करोड़ रुपये के अपात्र इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का पता चलने का दावा किया गया है। मामले में त्रिलोकपुर, कालाअंब स्थित एक फार्मा कंपनी के प्रबंध निदेशक को गिरफ्तार किया गया है।
जांच के अनुसार, समय फार्मा इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और एम/एस ड्यूल हैल्थ केयर द्वारा ऐसी फर्मों से जारी इनवॉइस के आधार पर ITC का लाभ लिया गया, जिनके वास्तविक अस्तित्व और कारोबार को लेकर जांच में सवाल उठे। विभाग का आरोप है कि इस क्रेडिट का आगे जीएसटी रिटर्न और रिफंड दावों में इस्तेमाल किया गया।
अधिकारियों के मुताबिक, लगभग 5.55 करोड़ रुपये का ITC दस कथित गैर-मौजूद फर्मों से संबंधित इनवॉइस के आधार पर लिया गया। जांच के दौरान कुछ अन्य लेन-देन भी सामने आए, जिनमें माल की आपूर्ति का उल्लेख था, लेकिन ई-वे बिल और टोल प्लाजा से प्राप्त उपलब्ध आंकड़ों की जांच में माल की वास्तविक आवाजाही की पुष्टि नहीं हो सकी।
CGST की जांच में एम/एस ड्यूल हैल्थ केयर की भूमिका भी जांच के दायरे में आई। विभाग के मुताबिक, इस इकाई का कथित तौर पर डमी फर्म के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा था और इसके संचालन में आरोपी की सक्रिय भूमिका के संकेत मिले।
मामले की जांच के दौरान अधिकारियों ने संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए। इसके अलावा डिजिटल रिकॉर्ड, व्हाट्सऐप चैट और बैंक खातों से जुड़े लेन-देन की भी पड़ताल की गई। जांच एजेंसी का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों से ऐसे नेटवर्क के संकेत मिले हैं, जिसमें दस्तावेजों में माल की खरीद-बिक्री दर्शाई गई, लेकिन वास्तविक रूप से माल की आवाजाही नहीं हुई।
विभाग के अनुसार, कथित तौर पर ऐसे आपूर्तिकर्ताओं के इनवॉइस का इस्तेमाल किया गया जिनके वास्तविक कारोबार या अस्तित्व की पुष्टि नहीं हो सकी। इन इनवॉइस के आधार पर ITC का दावा किए जाने और बाद में उसे जीएसटी रिटर्न तथा रिफंड दावों में इस्तेमाल किए जाने की बात जांच में सामने आई है।
CGST आयुक्तालय के मुताबिक, जांच में जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर आरोपी प्रबंध निदेशक को केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम, 2017 की धारा 69(1) के तहत गिरफ्तार किया गया है। मामले में आगे की जांच जारी है।
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