नमस्कार 🙏 हमारे न्यूज पोर्टल - मे आपका स्वागत हैं ,यहाँ आपको हमेशा ताजा खबरों से रूबरू कराया जाएगा , खबर ओर विज्ञापन के लिए संपर्क करे +91 70187 41157 ,हमारे यूट्यूब चैनल को सबस्क्राइब करें, साथ मे हमारे फेसबुक को लाइक जरूर करें , लद्दाख सोलर प्रोजेक्ट की ट्रांसमिशन लाइन पर विरोध – भारतीय नेशनल न्यूज

लद्दाख सोलर प्रोजेक्ट की ट्रांसमिशन लाइन पर विरोध

😊 कृपया इस न्यूज को शेयर करें😊

लद्दाख के प्रस्तावित सोलर प्रोजेक्ट की ट्रांसमिशन लाइन पर उठे सवाल, परियोजना की समीक्षा की मांग

ईको-सेंसिटिव हिमालयी क्षेत्र में बड़े प्रोजेक्ट को लेकर पर्यावरणविद चिंतित

हिमालयी क्षेत्र को ईको-सेंसिटिव जोन घोषित किए जाने के बावजूद यहां बड़े ऊर्जा और आधारभूत ढांचा प्रोजेक्ट प्रस्तावित किए जाने से पर्यावरण को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। केंद्र सरकार के ऊर्जा मंत्रालय से जुड़े पावर ग्रिड कॉरपोरेशन के प्रस्तावित 20 हजार मेगावाट क्षमता वाले सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट को लद्दाख के पांग और कारगिल क्षेत्र में स्थापित करने की मंजूरी मिल चुकी है।

परियोजना से उत्पादित बिजली को हिमाचल प्रदेश के लाहुल क्षेत्र से होते हुए रोहतांग, मनाली, कुल्लू, मंडी और बिलासपुर के रास्ते हरियाणा के कैथल तक पहुंचाने की योजना है। प्रस्तावित ट्रांसमिशन नेटवर्क की लंबाई करीब एक हजार किलोमीटर बताई जा रही है। इसी को लेकर हिमालयी क्षेत्र में पर्यावरणीय प्रभाव और स्थानीय जमीन पर पड़ने वाले असर को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

पर्यावरण से जुड़े लोगों का कहना है कि संवेदनशील हिमालयी इलाके में इतनी बड़ी ट्रांसमिशन लाइन के निर्माण से पहाड़ी भू-भाग और प्राकृतिक पारिस्थितिकी पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। लद्दाख के शीत मरुस्थलीय क्षेत्र में कई ग्लेशियरों के आसपास से गुजरने वाली संभावित लाइन को लेकर भी चिंता जताई जा रही है।

हिमाचल में प्रस्तावित ट्रांसमिशन कॉरिडोर का असर कृषि और बागवानी भूमि पर पड़ने की आशंका भी व्यक्त की जा रही है। किसानों और बागवानों को डर है कि परियोजना के लिए जमीन के इस्तेमाल से खेती और फल उत्पादन प्रभावित हो सकता है, जिसका सीधा असर स्थानीय आजीविका और खाद्य उत्पादन पर पड़ेगा।

फिलहाल परियोजना के लिए हाई वोल्टेज डायरेक्ट करंट (HVDC) ट्रांसमिशन लाइन का प्रस्ताव है। हालांकि, पावर ग्रिड कॉरपोरेशन इस व्यवस्था के स्थान पर अल्टरनेटिंग करंट (AC) प्रणाली अपनाने के विकल्प पर भी विचार कर रहा है। बताया जा रहा है कि ऐसा करने पर करीब 100 अरब रुपये की अतिरिक्त लागत आ सकती है। वहीं, केवल ट्रांसमिशन लाइन पर लगभग 450 अरब रुपये खर्च होने का अनुमान है।

परियोजना को मंजूरी मिलने के बाद प्रस्तावित ट्रांसमिशन लाइन के खिलाफ भी आवाजें उठने लगी हैं। पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों का कहना है कि इतने बड़े प्रोजेक्ट को अंतिम रूप देने से पहले हिमालयी पर्यावरण पर इसके संभावित प्रभाव का व्यापक वैज्ञानिक अध्ययन होना चाहिए।

उनकी मांग है कि पर्यावरण विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों की सलाह के आधार पर ट्रांसमिशन लाइन के लिए वैकल्पिक मार्ग या तकनीकी विकल्प तलाशे जाएं, ताकि ऊर्जा परियोजना के साथ-साथ हिमालय के संवेदनशील पर्यावरण, कृषि भूमि और स्थानीय लोगों के हितों की भी रक्षा हो सके।

Whatsapp बटन दबा कर इस न्यूज को शेयर जरूर करें 

Advertising Space


स्वतंत्र और सच्ची पत्रकारिता के लिए ज़रूरी है कि वो कॉरपोरेट और राजनैतिक नियंत्रण से मुक्त हो। ऐसा तभी संभव है जब जनता आगे आए और सहयोग करे.

Donate Now

लाइव कैलेंडर

November 2026
M T W T F S S
 1
2345678
9101112131415
16171819202122
23242526272829
30