कीरतपुर-मनाली हाईवे पर रॉक बोल्टिंग से थमेगा भू-स्खलन
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कीरतपुर-मनाली-लेह मार्ग पर भू-स्खलन और बाढ़ से निपटने की तैयारी, रॉक बोल्टिंग बनेगी सुरक्षा कवच
कुल्लू। सामरिक रूप से अहम कीरतपुर-मनाली-लेह मार्ग को भू-स्खलन और ब्यास नदी की बाढ़ से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए स्थायी सुरक्षा उपायों पर काम शुरू कर दिया गया है। फोरलेन बनने के बावजूद बरसात के दौरान पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और नदी के तेज बहाव के कारण कई बार यातायात प्रभावित होता रहा है। ऐसे में अब संवेदनशील हिस्सों की सुरक्षा के लिए दीर्घकालिक योजना के तहत निर्माण कार्य आगे बढ़ाया जा रहा है।
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की ओर से राष्ट्रीय राजमार्ग-3 के पंडोह से कुल्लू के बीच चिन्हित अति संवेदनशील स्थानों पर भू-स्खलन और नदी कटाव रोकने के लिए स्थायी उपाय किए जा रहे हैं। यह परियोजना ईपीसी (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन) मोड में संचालित की जा रही है और निर्माण गतिविधियों में तेजी लाई गई है।
रॉक बोल्टिंग से पहाड़ों को मिलेगी मजबूती
भू-स्खलन संभावित क्षेत्रों में रॉक बोल्टिंग तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इस तकनीक के माध्यम से चट्टानी ढलानों को मजबूती देकर उनके खिसकने की संभावना कम करने का प्रयास किया जाएगा। इससे हाईवे के उन हिस्सों को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी, जहां बरसात के दौरान लगातार भूस्खलन का खतरा बना रहता है।
ब्यास के कटाव से बचाने के लिए सुरक्षा दीवार
पिछले कुछ वर्षों में ब्यास नदी में आई भीषण बाढ़ के दौरान मनाली, आलू ग्राउंड, बिंदु ढोग, डोभी, टोल प्लाजा, रायसन और पतलीकूहल सहित कई स्थानों पर फोरलेन को भारी नुकसान पहुंचा था। नदी के कटाव से सड़क के कई हिस्सों पर अस्तित्व का संकट पैदा हो गया था।
अब नदी के किनारे सड़क को सुरक्षित रखने के लिए कंकरीट की सुरक्षा दीवार तैयार की जा रही है। कुल्लू क्षेत्र में गेमन पुल से बाशिंग तक नदी किनारे सुरक्षा दीवार की नींव तैयार करने का काम चल रहा है। इसके लिए कई जेसीबी मशीनें निर्माण स्थल पर लगाई गई हैं। छरूडू में निर्माण सामग्री तैयार करने के लिए मिक्सचर प्लांट भी स्थापित किया जा चुका है।
सहायक नदियों पर बनेंगे चेक डैम
ब्यास नदी में अचानक बढ़ने वाले जलस्तर और बाढ़ के प्रभाव को कम करने के लिए इसकी सहायक नदियों पर चेक डैम बनाने की भी योजना है। इन संरचनाओं का उद्देश्य पानी के तेज बहाव को नियंत्रित करना और नदी के कटाव से हाईवे को होने वाले नुकसान को कम करना है।
इन उपायों के पूरा होने के बाद कीरतपुर-मनाली मार्ग के संवेदनशील हिस्सों को भूस्खलन, नदी कटाव और बाढ़ से बेहतर सुरक्षा मिलने की उम्मीद है। इससे बरसात के दौरान यातायात व्यवस्था को अधिक सुरक्षित और सुचारू बनाए रखने में मदद मिलेगी।
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