चेहनी पास सुरंग: पांगी के भविष्य का रास्ता
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पांगी को सिर्फ आश्वासन नहीं, ठोस राजनीतिक इच्छाशक्ति चाहिए
पांगी—लगभग 1,595 वर्ग किलोमीटर में फैला वह दुर्गम क्षेत्र, जो पीर पंजाल और जांस्कर की पर्वत श्रेणियों के बीच स्थित है। चंबा रियासत के समय से लेकर आज तक पांगी की बाहरी दुनिया से आवाजाही का सबसे महत्वपूर्ण मार्ग सच पास रहा है। करीब 14,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह दर्रा वर्ष में केवल चार-पांच महीने ही यातायात के लिए खुला रहता है।
इसका सीधा असर करीब 25,000 पंगवालों के जीवन पर पड़ता है, जिन्हें वर्ष के लगभग आठ महीने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण शेष देश से सीमित संपर्क में रहना पड़ता है।
1. यह मांग आज की नहीं है
पांगी के लिए चेहनी पास सुरंग की मांग पांच दशक से भी अधिक पुरानी है। 1971-72 के दौरान पंगवाल नेताओं ने तत्कालीन हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. वाई.एस. परमार और तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी के समक्ष इस क्षेत्र को बारहमासी संपर्क देने के लिए सुरंग की मांग रखी थी।
बाद में लाहौल क्षेत्र के लोगों ने भी इसी प्रकार रोहतांग सुरंग की मांग उठाई। वर्षों की प्रक्रिया के बाद वही मांग अटल टनल के रूप में 2020 में पूरी हुई।
ऐसे में स्वाभाविक प्रश्न है—पांगी की दशकों पुरानी मांग अब तक निर्णायक चरण तक क्यों नहीं पहुंची?
2. व्यवहार्यता पर शुरुआती अध्ययन हो चुका है
प्रदेश सरकार के निर्देश पर SJVNL, शिमला ने वर्ष 2012 में इस प्रस्ताव पर सर्वेक्षण शुरू किया था। वर्ष 2014 में प्रस्तुत Pre-Feasibility Report में देवी कोठी (चुराह) से मिंधल (पांगी) के बीच लगभग 13 किलोमीटर लंबी सुरंग को व्यवहार्य बताया गया था।
उस समय अनुमानित लागत लगभग ₹1,990 करोड़ थी और इससे तीसा-किलाड़ के बीच की दूरी करीब 88 किलोमीटर तक कम होने की संभावना बताई गई थी।
आज अनुमानित लागत बढ़कर लगभग ₹4,000 करोड़ बताई जा रही है। इससे यह सवाल और महत्वपूर्ण हो जाता है कि जब प्रारंभिक स्तर पर परियोजना की व्यवहार्यता सामने आ चुकी थी, तो आगे की प्रक्रिया में इतनी लंबी देरी क्यों हुई?
3. प्रस्तावित राष्ट्रीय राजमार्ग का मामला भी लंबित
वर्ष 2016 में MoRTH ने द्रम्मण-सिहुंता-चुवारी-जोत-चंबा-कोटी-तीसा-किलाड़, लगभग 271 किलोमीटर लंबे मार्ग को सैद्धांतिक रूप से राष्ट्रीय राजमार्ग के रूप में घोषित किया था।
1 जनवरी 2018 को PIDC को इस संबंध में कंसल्टेंट नियुक्त किया गया।
लेकिन 2024 तक उपलब्ध जवाब यही था कि इस संबंध में अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।
पांगी के लिए यह केवल किसी सड़क की अधिसूचना का विषय नहीं है। यह क्षेत्र के स्थायी, सुरक्षित और वर्षभर संपर्क का सवाल है।
4. 23 मार्च 2026 का BRO पत्र नई तस्वीर सामने रखता है
23 मार्च 2026 को HQ Chief Engineer, Project Deepak, C/o 56 APO की ओर से पत्र संख्या 75004/PO/96/E2 Plg जारी किया गया। यह पत्र माननीय सांसद श्री हर्ष महाजन के VIP Reference के संदर्भ में HQ DGBR को भेजा गया था और इस पर कर्नल परवीन आनंद, निदेशक (योजना) के हस्ताक्षर हैं।
पत्र में पांगी और सच पास मार्ग के सामरिक तथा संपर्क संबंधी महत्व का उल्लेख किया गया है।
BRO के पत्र के अनुसार पांगी घाटी भारत-पाकिस्तान सीमा और LAC के निकट है तथा सच पास मार्ग सैनिकों की आवाजाही के लिए अपेक्षाकृत तेज और विश्वसनीय संपर्क प्रदान करता है। पत्र में यह भी कहा गया है कि मनाली-लेह अथवा रोहतांग मार्ग बाधित होने की स्थिति में यह उत्तर-दक्षिण संपर्क के वैकल्पिक मार्ग के रूप में उपयोगी हो सकता है।
वर्तमान में चंबा-भांजरू-तीसा-बैरागढ़-सतरुंडी-सच पास-बगोटू-किलाड़ मार्ग का रखरखाव राज्य PWD द्वारा किया जा रहा है। पत्र में सच पास की लगभग 14,500 फीट ऊंचाई और वर्ष में केवल चार-पांच महीने खुले रहने की स्थिति का भी उल्लेख है।
इसी समस्या के समाधान के लिए 2018 में राज्य PWD द्वारा तीसा टनल/चेहनी पास सुरंग के प्रस्ताव पर विचार किए जाने और इससे चंबा-किलाड़ दूरी लगभग 88 किलोमीटर घटने की बात भी दर्ज है।
पत्र में प्रस्तावित सुरंग के उत्तरी पोर्टल को मिंधल गांव के पास, संसारी-किलाड़-थीओर्ट-टांडी मार्ग पर स्थित किए जाने का उल्लेख है। यानी प्रस्तावित सुरंग का मिंधल से जुड़ाव स्पष्ट रूप से दर्ज है।
5. मामला केवल पांगी तक सीमित नहीं रह गया
BRO के इसी पत्र का एक और महत्वपूर्ण पहलू है।
पत्र में सिफारिश की गई है कि द्रम्मण-सिहुंता-चौवारी-जोत-चंबा-कोटी-तीसा-त्रैला-किलाड़-संसारी-गुलाबगढ़-कुंडल-मचैल-तुंगरी-पदुम-निराक-निमू और लेह तक जाने वाले पूरे मार्ग को BRD Programme तथा LTRoWP 2023-28 में शामिल किया जाए, यदि यह सड़क BRO/Project Deepak को सौंपी जाती है।
इसका अर्थ है कि प्रस्तावित संपर्क व्यवस्था को केवल चंबा-किलाड़ मार्ग के रूप में नहीं, बल्कि आगे लेह से जुड़ने वाले व्यापक कॉरिडोर के रूप में भी देखा जा रहा है।
6. मुख्यमंत्री की ओर से BRO को सड़क सौंपने की मांग
BRO के पत्र में 12 अप्रैल 2025 को तत्कालीन DGBR लेफ्टिनेंट जनरल रघु श्रीनिवासन और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री के बीच हुई बातचीत का भी उल्लेख है।
पत्र के अनुसार मुख्यमंत्री ने कहा था कि राज्य सरकार के पास पर्याप्त धन की सीमाएं हैं और इसलिए चंबा-बैरागढ़-सच पास-किलाड़ सड़क को राज्य PWD से लेकर BRO के अधीन किया जाना चाहिए।
इसके अगले दिन, 13 अप्रैल 2025 को Project Deepak की ओर से HQ DGBR/West Directorate को इस संबंध में औपचारिक सूचना भेजे जाने का भी उल्लेख पत्र में है।
वहीं संसारी से आगे लेह की दिशा में प्रस्तावित मार्ग का रेकी कार्य बर्फ हटने के बाद अप्रैल-मई 2026 में किए जाने की बात भी सामने आती है।
7. अब अगला कदम क्या होना चाहिए?
आज स्थिति यह है कि—
- चेहनी पास सुरंग के लिए प्रारंभिक व्यवहार्यता अध्ययन हो चुका है।
- सुरंग से चंबा-किलाड़ दूरी में लगभग 88 किलोमीटर की कमी की संभावना बताई गई है।
- मुख्यमंत्री की ओर से सड़क को BRO को सौंपने की मांग दर्ज है।
- BRO ने मार्ग के सामरिक महत्व को अपने पत्र में रेखांकित किया है।
- BRO ने द्रम्मण से लेह तक के व्यापक कॉरिडोर को BRD Programme/LTRoWP में शामिल करने की सिफारिश की है।
- सांसद स्तर से भी इस विषय को उठाया गया है।
इसके बावजूद परियोजना अभी तक निर्णायक क्रियान्वयन के चरण में नहीं पहुंची है।
इसलिए अब पांगी के सामने सबसे बड़ा प्रश्न यह नहीं है कि समस्या क्या है। समस्या दशकों से ज्ञात है। प्रश्न यह है कि उपलब्ध अध्ययनों, सरकारी पत्राचार और प्रस्तावों को धरातल पर उतारने के लिए अगला ठोस निर्णय कब लिया जाएगा?
हमारी दो स्पष्ट मांगें
1. चेहनी पास की लगभग 13 किलोमीटर लंबी सुरंग को PM गति शक्ति और LTRoWP 2023-28 के अंतर्गत लाने की प्रक्रिया तेज की जाए तथा DPR तैयार करने की दिशा में तत्काल कार्रवाई हो।
2. द्रम्मण-लेह कॉरिडोर को BRO/Project Deepak के अधीन लाने की प्रक्रिया को शीघ्र पूरा किया जाए।
पांगी के लिए सड़क केवल आवागमन का साधन नहीं है। यह शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, व्यापार, प्रशासनिक संपर्क और राष्ट्रीय मुख्यधारा से जुड़े रहने का आधार है।
पांगी के लोगों को वर्षों तक केवल आश्वासनों के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। उन्हें स्थायी और सुरक्षित संपर्क चाहिए—और उस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए अब घोषणाओं से आगे बढ़कर निर्णय और क्रियान्वयन की आवश्यकता है।
पांगी की आवाज एक ही है—बारहमासी सड़क संपर्क हमारा अधिकार है।
जय पांगी, जय पंगवाल।
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