फिशिंग लिंक से रहें सावधान
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फिशिंग लिंक से रहें सतर्क, वेबसाइट खोलने से पहले ऐसे परखें उसकी विश्वसनीयता
प्रदेश में इंटरनेट ब्राउजिंग के जरिए साइबर ठगी की शिकायतें बढ़ीं, साइबर सेल ने जारी की एडवाइजरी
इंटरनेट का इस्तेमाल बढ़ने के साथ ही ऑनलाइन ठगी के नए मामले भी सामने आ रहे हैं। साइबर अपराधी नकली वेबसाइट, फिशिंग लिंक, संदिग्ध पॉप-अप और अन्य डिजिटल तरीकों का इस्तेमाल कर लोगों की निजी जानकारी और पैसे तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रहे हैं। हिमाचल प्रदेश में इंटरनेट ब्राउजिंग से जुड़ी शिकायतें सामने आने के बाद साइबर सेल ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
राज्य अपराध अन्वेषण विभाग की ओर से जारी दिशा-निर्देशों में नागरिकों से वेबसाइट खोलने या किसी लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी विश्वसनीयता जांचने को कहा गया है। साइबर सेल के अनुसार, थोड़ी सी सावधानी बरतकर कई तरह के ऑनलाइन फ्रॉड से बचा जा सकता है।
वेबसाइट का यूआरएल जरूर जांचें
किसी वेबसाइट पर जाने से पहले उसके यूआरएल को ध्यान से देखें। वेबसाइट के पते में HTTPS:// होना सुरक्षा का एक जरूरी संकेत है। इसके साथ ही डोमेन नेम में असामान्य स्पेलिंग, अतिरिक्त अक्षर या अजीब बदलाव दिखाई दें तो सावधान हो जाएं। उदाहरण के तौर पर किसी वास्तविक वेबसाइट से मिलता-जुलता लेकिन बदला हुआ डोमेन फिशिंग वेबसाइट का संकेत हो सकता है।
लिंक पर क्लिक करने से पहले करें जांच
कंप्यूटर पर किसी लिंक को खोलने से पहले उस पर माउस ले जाकर उसका वास्तविक वेब एड्रेस देखा जा सकता है। यदि लिंक का गंतव्य संदिग्ध या वेबसाइट के नाम से अलग दिखाई दे, तो उस पर क्लिक करने से बचें।
साइबर सेल ने लोगों को संदिग्ध लिंक, अनजान वेबसाइट और भ्रामक पॉप-अप से दूरी बनाए रखने की सलाह दी है। वेबसाइट की विश्वसनीयता को लेकर संदेह होने पर Google Safe Browsing Tool की मदद से भी जांच की जा सकती है।
साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक रहना ऑनलाइन ठगी से बचाव का महत्वपूर्ण तरीका है। किसी भी वेबसाइट या लिंक पर जल्दबाजी में जानकारी साझा करने अथवा भुगतान करने से पहले उसकी सत्यता की पुष्टि करना जरूरी है।
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