भारत-रूस व्यापार को 2030 तक 100 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में करीब 45 मिनट तक द्विपक्षीय वार्ता हुई। बातचीत में दोनों देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया।
बैठक में भारत और रूस ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर के स्तर तक पहुंचाने का लक्ष्य सामने रखा। फिलहाल दोनों देशों के बीच सालाना कारोबार लगभग 60 अरब डॉलर है, जिसमें रूस से भारत द्वारा किए जाने वाले कच्चे तेल के आयात की बड़ी हिस्सेदारी है। आने वाले चार वर्षों में व्यापार में करीब 40 अरब डॉलर की अतिरिक्त वृद्धि के लिए दोनों देश नए कारोबारी क्षेत्रों की तलाश, बाजारों तक बेहतर पहुंच और रूस में भारतीय उत्पादों की मांग बढ़ाने जैसे कदमों पर काम कर सकते हैं।
वार्ता के दौरान औद्योगिक सहयोग के साथ-साथ सिविल न्यूक्लियर एनर्जी पर भी चर्चा हुई। परमाणु ईंधन की उपलब्धता तथा परमाणु परियोजनाओं के लिए लंबे समय तक तकनीकी और अन्य आवश्यक सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर दोनों पक्षों ने विचार किया।
भारतीय कुशल कामगारों के रूस जाने का विषय भी बातचीत का हिस्सा रहा। दोनों देश ऐसी व्यवस्था विकसित करने पर विचार कर रहे हैं, जिससे अधिक संख्या में भारतीय स्किल्ड प्रोफेशनल्स रूस में रोजगार के अवसर हासिल कर सकें। इससे एक ओर भारतीय कामगारों के लिए नए अवसर पैदा हो सकते हैं, वहीं रूस की कुशल मानव संसाधन संबंधी जरूरतों को पूरा करने में भी मदद मिल सकती है।
इसके अलावा क्रिटिकल मिनरल्स और रूस से खाद की नियमित आपूर्ति जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे भी दोनों नेताओं की बातचीत के एजेंडे में शामिल रहे। कुल मिलाकर बैठक में भारत-रूस आर्थिक साझेदारी को व्यापक बनाने और पारंपरिक क्षेत्रों से आगे नए सहयोग के रास्ते तलाशने पर जोर दिया गया।
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