सृष्टि शर्मा को राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान
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शिक्षा के प्रति समर्पण ने सृष्टि शर्मा को दिलाया राज्य स्तरीय सम्मान
जेब खर्च से स्कूल में जुटाईं सुविधाएं, बच्चों की संख्या 16 से बढ़ाकर 34 तक पहुंचाई
सिरमौर जिले के पच्छाद तहसील के दूरदराज गांव सेरपड़ोल की रहने वाली जेबीटी शिक्षिका सृष्टि शर्मा ने अपने समर्पण और प्रयासों से सरकारी स्कूल में शिक्षा के प्रति बच्चों और अभिभावकों का भरोसा मजबूत किया है। वर्तमान में वह राजकीय प्राथमिक पाठशाला प्रेमनगर, जिला सिरमौर में सेवाएं दे रही हैं। शिक्षा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान को देखते हुए शिक्षक दिवस के अवसर पर पांच सितंबर को राज्यपाल ने उन्हें राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान से सम्मानित किया।
सृष्टि शर्मा वर्ष 2022 से प्रेमनगर स्कूल में कार्यरत हैं। उस समय स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या 16 थी, जिसे उन्होंने लगातार प्रयासों के माध्यम से बढ़ाकर 34 तक पहुंचाया। निजी स्कूलों की ओर बढ़ते रुझान के बीच सरकारी स्कूल की ओर बच्चों को आकर्षित करने के लिए उन्होंने घर-घर जाकर अभिभावकों से संपर्क किया और सरकारी विद्यालय में उपलब्ध शिक्षा सुविधाओं तथा बेहतर माहौल के बारे में जानकारी दी।
कमजोर विद्यार्थियों की पढ़ाई को मजबूत करने के लिए उन्होंने नियमित कक्षाओं के अतिरिक्त रेमेडियल क्लास की शुरुआत की। सुबह 9:20 से 9:55 बजे तक चलने वाली इन कक्षाओं में बच्चों की व्यक्तिगत जरूरत के अनुसार पढ़ाई पर ध्यान दिया जाता है। उनका प्रयास रहा कि प्रत्येक विद्यार्थी अपनी क्षमता के अनुरूप आगे बढ़ सके।
सृष्टि शर्मा ने बच्चों को विभिन्न प्रतियोगिताओं के लिए भी व्यक्तिगत स्तर पर तैयार किया। उनके मार्गदर्शन का परिणाम यह रहा कि एक विद्यार्थी ने ब्लॉक स्तर पर आयोजित स्वर्ण जयंती मिडिल मेरिट स्कॉलरशिप परीक्षा में सफलता हासिल की। इसके अलावा विद्यार्थियों को ओलंपियाड जैसी प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए भी तैयार किया जा रहा है।
स्कूल में विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए सृष्टि शर्मा ने अपने निजी खर्च से आरओ सिस्टम और ब्लेजर की व्यवस्था भी की। सीमित संसाधनों के बावजूद बच्चों की पढ़ाई और व्यक्तित्व विकास के लिए उनके लगातार प्रयासों ने विद्यालय की तस्वीर बदलने में अहम भूमिका निभाई।
शिक्षा के प्रति उनकी निष्ठा, मेहनत और विद्यार्थियों के हित में किए गए इन प्रयासों को राज्य स्तर पर पहचान मिली। शिक्षक दिवस पर मिला सम्मान न केवल सृष्टि शर्मा के व्यक्तिगत योगदान की सराहना है, बल्कि उन शिक्षकों के लिए भी प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों में रहकर बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए निरंतर काम कर रहे हैं।
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