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कुल्लू में 17 करोड़ की नई जेल तैयार, 135 कैदियों को रखने की क्षमता

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जिला कुल्लू में कैदियों की बढ़ती संख्या और पुरानी जेल की सीमित क्षमता से पैदा हो रही परेशानी जल्द दूर होने की उम्मीद है। सारी पंचायत भवन के समीप तैयार की गई नई जेल का अधिकांश निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। अब कुछ बाहरी काम और सुरक्षा दीवार का निर्माण बाकी है। ऐसे में इस वर्ष कुल्लू दशहरा के दौरान नई जेल का लोकार्पण होने की संभावना जताई जा रही है।

ढालपुर स्थित पुरानी जेल की क्षमता महज 33 कैदियों की है, लेकिन कई बार यहां कैदियों की संख्या क्षमता से दो से तीन गुना तक पहुंच चुकी है। नशे से जुड़े मामलों में गिरफ्तारियों की संख्या बढ़ने के कारण जेल में अतिरिक्त दबाव बना रहता है। स्थिति अधिक गंभीर होने पर कैदियों को नाहन जेल भेजना पड़ता है। फिलहाल 33 कैदियों की क्षमता वाली पुरानी जेल में 82 कैदी बंद हैं।

कुछ निर्माण कार्य अभी बाकी

कुल्लू जेल अधीक्षक विशाल कुमार डोगरा के अनुसार नई जेल का मुख्य निर्माण पूरा हो गया है। परिसर के कुछ बाहरी कार्य, सुरक्षा दीवार और पानी की सफाई से संबंधित काम अभी किया जाना बाकी है। नई जेल में कुल 135 कैदियों को रखने की व्यवस्था होगी, जिससे मौजूदा जेल पर पड़ रहा दबाव काफी कम होने की उम्मीद है।

तीन दशक तक चलता रहा जमीन का इंतजार

कुल्लू में नई जेल बनाने की योजना लंबे समय तक सरकारी प्रक्रियाओं में उलझी रही। जेल विभाग को उपयुक्त जमीन तलाशने में करीब 30 वर्ष लग गए। लगभग 18 वर्ष पहले भूमि चयन की प्रक्रिया ने गति पकड़ी थी। इस दौरान टिकरा बाबड़ी और मौहल खड्ड सहित कई स्थानों पर जमीन देखी गई। अंततः वैष्णो मंदिर के समीप की भूमि को नई जेल के लिए चुना गया।

नई जेल के निर्माण की आधारशिला पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के कार्यकाल में रखी गई थी।

निर्माण पर खर्च हुए करीब 17 करोड़ रुपये

नई जेल के लिए भूमि चयन के समय करीब 1.72 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था। भूमि चयन और पैमाइश की प्रक्रिया तत्कालीन उपायुक्त चमेल सिंह सहित संबंधित अधिकारियों की देखरेख में हुई थी। जेल अधीक्षक के अनुसार अब तक निर्माण कार्य पर लगभग 17 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।

नई जेल शुरू होने के बाद न केवल क्षमता से अधिक कैदियों को रखने की समस्या कम होगी, बल्कि जरूरत पड़ने पर कैदियों को दूसरे जिलों की जेलों में स्थानांतरित करने की स्थिति भी काफी हद तक टल सकती है।

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