गुरु रविदास जी का दर्शन आज भी प्रासंगिक
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गुरु रविदास जी महाराज के ‘बेगमपुरा’ की संकल्पना एक ऐसे आदर्श समाज की कल्पना प्रस्तुत करती है, जहाँ किसी भी प्रकार का भेदभाव, शोषण या सामाजिक असमानता न हो। उनकी बाणी में व्यक्त विचार न्याय, शांति, समानता और आपसी भाईचारे पर आधारित समाज के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।
वित्त मंत्री ने विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों से गुरु रविदास जी महाराज की बाणी और शिक्षाओं का गंभीरता से अध्ययन करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को उनकी शिक्षाओं के मूल भाव को समझने के साथ-साथ वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों में उनकी उपयोगिता पर भी विचार करना चाहिए। उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों को आध्यात्मिक महापुरुषों और समाज सुधारकों के विचारों पर शोध, संवाद तथा अकादमिक चर्चा को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
सेमिनार में विभिन्न विद्वानों ने गुरु रविदास जी महाराज की विचारधारा के विविध पहलुओं पर अपने विचार रखे। गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (जी.एन.डी.यू.), अमृतसर के पंजाबी विभाग के प्रमुख प्रो. मनजिंदर सिंह और तप स्थान श्री गुरु रविदास जी, खुरालगढ़ के संत केवल सिंह जी ने अपने संबोधनों में उनकी शिक्षाओं की वर्तमान समय में उपयोगिता पर प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि सामाजिक भेदभाव को समाप्त करने और समानता की भावना को मजबूत करने के लिए गुरु रविदास जी महाराज का दर्शन आज भी महत्वपूर्ण प्रेरणा देता है।
कार्यक्रम में एमिटी यूनिवर्सिटी, मोहाली के प्रो-वाइस चांसलर डॉ. पुनीत शर्मा और रजिस्ट्रार डॉ. दलीप कुमार सहित विश्वविद्यालय की प्रमुख शैक्षणिक हस्तियां मौजूद रहीं। डॉ. दलीप कुमार ने धन्यवाद प्रस्ताव के माध्यम से सरकारी विभागों, आमंत्रित विद्वानों, विश्वविद्यालय के फैकल्टी सदस्यों और सेमिनार में शामिल विद्यार्थियों के सहयोग के प्रति आभार प्रकट किया।
कार्यक्रम में एस.डी.एम. मोहाली श्रीमती दमनदीप कौर, पंजाब के उच्च शिक्षा विभाग के उप निदेशक डॉ. मनीष शर्मा तथा एमिटी यूनिवर्सिटी के फैकल्टी सदस्य और विद्यार्थी भी उपस्थित रहे।
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