आपदा प्रबंधन में कांग्रेस सरकार पर सवाल: रणधीर शर्मा
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आपदा प्रबंधन में कांग्रेस सरकार पर सवाल: रणधीर शर्मा
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आपदा के बीच मंत्री विक्रमादित्य का विदेश दौरा — आखिर इतना ज़रूरी काम क्या था?
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फील्ड स्टाफ मौके पर तभी पहुंचता है जब विधायक फ़ोन करे — यह गंभीर स्थिति है।
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बरसात से पहले कोई ठोस तैयारी बैठक नहीं हुई, जबकि यह हर साल की समस्या है।
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ठेकेदार राहत कार्य करने से हिचक रहे हैं — उन्हें बिल फंसने का डर है।
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जनता मुख्यमंत्री राहत कोष में राशि जमा करने के बजाय सीधे पीड़ितों तक मदद पहुँचा रही है, कई लोग विपक्ष के नेता जयराम ठाकुर के माध्यम से सहयोग दे रहे हैं।
शिमला में भाजपा विधायक और मीडिया प्रभारी रणधीर शर्मा ने कहा कि आपदा में चाहे नुकसान कितना भी हो, गरीबों के लिए उसका असर हमेशा गहरा होता है। उनका आरोप है कि राजस्व विभाग और फील्ड स्टाफ की जिम्मेदारी मौके पर जाकर राहत पहुंचाने की होती है, लेकिन वे तभी सक्रिय होते हैं जब किसी विधायक से निर्देश मिले। उन्होंने कहा कि सरकार को चाहिए कि ऐसे हालात में सभी अधिकारी खुद पहल करें।
शर्मा ने बरसात और आपदा प्रबंधन पर सरकार की गंभीरता पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जुलाई से सितंबर तक बारिश का मौसम तय है, लेकिन सरकार ने कभी पहले से ठोस योजना नहीं बनाई। उनके अनुसार, जैसे ही भारी बारिश शुरू होती है, बाढ़ की समस्या बढ़ जाती है और सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी रहती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार आपदा के समय पूरी तरह नाकाम रही है। राजस्व मंत्री और लोक निर्माण विभाग के मंत्री के रवैये पर भी उन्होंने सवाल उठाए, खासतौर पर यह कहते हुए कि संकट की घड़ी में मंत्री विक्रमादित्य विदेश दौरे पर चले गए। शर्मा ने तंज कसा कि आपदा से ज्यादा जरूरी काम कौन सा हो सकता है।
शर्मा के मुताबिक, भाजपा शासन में ठेकेदार तुरंत राहत कार्य शुरू कर देते थे और भुगतान की चिंता नहीं रहती थी, जबकि अब कांग्रेस सरकार में स्थिति उलट है — ठेकेदार काम करने से बच रहे हैं क्योंकि उन्हें डर है कि बिल समय पर पास नहीं होंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि जनता अब सरकार पर भरोसा नहीं कर रही — लोग मुख्यमंत्री राहत कोष में पैसा देने के बजाय सीधे प्रभावित परिवारों को मदद पहुँचा रहे हैं, अक्सर नेता प्रतिपक्ष के माध्यम से।
शर्मा ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार के भीतर गुटबाजी के कारण पीड़ितों तक राहत पहुँचाने में रुकावटें आ रही हैं। मुख्यमंत्री जिन मंत्रियों से असहमत हैं, उनके विभागों के बजट आवंटन में कटौती की जा रही है, जिससे प्रभावित इलाकों में कार्य धीमे पड़ रहे हैं।
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