अंतरराष्ट्रीय परिवार दिवस: भारत की भूमिका एक वैश्विक परिवार में — डॉ. जनक राज
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शिमला: अंतरराष्ट्रीय परिवार दिवस के अवसर पर भाजपा विधायक डॉ. जनक राज ने कहा कि यह दिन हमें परिवार के महत्व और उसके सामाजिक योगदान को समझने का अवसर देता है। उन्होंने कहा, यदि हम पूरी दुनिया की कल्पना एक विशाल गाँव के रूप में करें, तो भारत उसमें एक परिश्रमी और आत्मनिर्भर परिवार के रूप में उभरता है।
उन्होंने कहा कि इस वैश्विक गाँव में अनेक परिवार हैं — कुछ संपन्न, कुछ साधनहीन, कुछ संघर्षशील और कुछ विकसित। भारत एक ऐसा परिवार है जिसने वर्षों तक अभावों का सामना किया, पर अब अपनी मेहनत, तकनीकी क्षमता, वैज्ञानिक सोच, चिकित्सा, अंतरिक्ष अनुसंधान और आर्थिक विकास के दम पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। आज वह उन देशों की बराबरी कर रहा है जो कभी से समृद्ध रहे हैं — जैसे अमेरिका, फ्रांस और जर्मनी।
डॉ. जनक राज के अनुसार, भारत की यह प्रगति कई देशों के लिए आश्चर्य और प्रतिस्पर्धा का विषय बन गई है। पड़ोसी राष्ट्र जैसे चीन, श्रीलंका, बांग्लादेश और नेपाल भारत की तरक्की को देखकर कभी-कभी संदेह, प्रतिस्पर्धा या ईर्ष्या का अनुभव करते हैं। वहीं, कुछ पहले के सहयोगी देश अब यह सोचते हैं कि भारत तो अब आत्मनिर्भर हो गया है, उसे हमारी मदद की आवश्यकता नहीं।
उन्होंने यह भी कहा कि यह व्यवहार असामान्य नहीं है, क्योंकि राष्ट्र भी मनुष्यों की तरह ही सोचते और प्रतिक्रिया करते हैं। जब कोई देश अथक प्रयास से प्रगति करता है, तो उसे व्यापक मान्यता मिलने में समय लग सकता है।
इस स्थिति में भारत को चाहिए कि वह एक परिवार की तरह संगठित हो, अपने आंतरिक मतभेदों को भुलाकर शिक्षा, नवाचार, आत्मनिर्भरता और समावेशी विकास की राह पर निरंतर आगे बढ़े। जब एक परिवार एकजुट होता है, तो वह हर संकट का सामना कर सकता है।
अंतरराष्ट्रीय परिवार दिवस पर डॉ. जनक राज ने आह्वान किया कि भारत को यह प्रण लेना चाहिए कि वह बिना रुके, बिना झुके, अपने लक्ष्यों की ओर बढ़ता रहेगा।
भारत एक परिवार है — और हम सब उसके अभिन्न सदस्य हैं।
साथ चलेंगे, तभी आगे बढ़ेंगे।
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