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127 शराब कारोबारी डिफाल्टर, 62 करोड़ की वसूली

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127 शराब विक्रेता डिफाल्टर घोषित, 62 करोड़ से ज्यादा की रिकवरी

वर्ष 2025-26 में 61 शराब कारोबारी डिफाल्टर की सूची में शामिल, बकाया वसूली के लिए कुर्की की कार्रवाई भी

प्रदेश में शराब कारोबारियों से बकाया राशि की वसूली को लेकर राज्य कर एवं आबकारी विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। विभाग के आंकड़ों के अनुसार पिछले तीन वर्षों में 127 शराब विक्रेता और वेंडर डिफाल्टर घोषित किए गए। इनसे बकाया रकम की वसूली के लिए विभिन्न स्तरों पर कार्रवाई की जा रही है। अब तक इन डिफाल्टरों से 62 करोड़ रुपये से अधिक की राशि रिकवर की जा चुकी है। जरूरत पड़ने पर बकाया वसूलने के लिए संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई भी की जा रही है।

विभागीय आंकड़ों के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2023-24 में आठ जिलों के 38 शराब विक्रेता एवं वेंडर डिफाल्टर पाए गए। इन पर कुल 121.01 करोड़ रुपये की रिकवरी निर्धारित की गई थी। इस अवधि में विभाग ने 17.75 करोड़ रुपये की राशि वसूल की।

वित्तीय वर्ष 2024-25 में छह जिलों के 28 कारोबारी डिफाल्टर घोषित हुए। इन पर कुल 52.41 करोड़ रुपये की बकाया राशि दर्ज की गई। विभाग ने इस साल 25.45 करोड़ रुपये की रिकवरी की।

वहीं, वित्तीय वर्ष 2025-26 में डिफाल्टर कारोबारियों की संख्या बढ़कर 61 हो गई। इन मामलों में विभाग के रिकॉर्ड में 132.93 करोड़ रुपये की रिकवरी राशि दर्ज है। इस अवधि में 18.91 करोड़ रुपये की वसूली की गई।

शराब कारोबार से 934.22 करोड़ रुपये का राजस्व

चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में भी शराब कारोबार से सरकार को अच्छी आय प्राप्त हुई है। आबकारी नीति के तहत 31 जुलाई तक राज्य को 934.22 करोड़ रुपये का राजस्व मिल चुका है। सरकार ने पूरे वित्तीय वर्ष के लिए आबकारी एवं शराब कारोबार से 2,870.16 करोड़ रुपये राजस्व जुटाने का लक्ष्य रखा है।

पुराने बकायेदारों पर भी कार्रवाई जारी

विभाग के अनुसार केवल पिछले तीन वित्तीय वर्षों के डिफाल्टर ही नहीं, बल्कि पुराने बकायेदारों से भी लंबित रकम की वसूली की जानी है। इसके लिए संबंधित मामलों में डिमांड रिट और कुर्की वारंट जैसी कार्रवाई की जा रही है।

बकाया राशि की वसूली के लिए हिमाचल प्रदेश भू-राजस्व अधिनियम, 1954 के प्रावधानों तथा अन्य लागू नियमों के तहत प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। सरकार का उद्देश्य लंबित राजस्व की अधिक से अधिक वसूली सुनिश्चित करना है।

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