एपीएमसी में महाघोटाले के आरोप: भाजपा ने उठाए पारदर्शिता पर सवाल
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एपीएमसी में बड़े घोटाले के आरोप, रिश्तेदारों को कम दाम पर मिली दुकानें : भाजपा
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सीए स्टोर और ई-मार्केट में करोड़ों की अनियमितताएँ
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भाजपा का आरोप: कांग्रेस सरकार “अली बाबा और चालीस चोरों” जैसी
शिमला। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता संदीपनी भारद्वाज ने आरोप लगाया है कि एपीएमसी में बड़े पैमाने पर घोटाले हुए हैं। उनका कहना है कि विभागीय सचिवों ने अपने नजदीकी रिश्तेदारों को दुकानों का आवंटन बेहद कम किराये पर किया। इसी तरह सीए स्टोर और ई-मार्केट से जुड़े आवंटनों में भी भारी गड़बड़ी हुई और यह सब मुख्यमंत्री के इशारे पर हो रहा है।
संदीपनी भारद्वाज के मुताबिक, एपीएमसी में दुकानें आवंटित करने की पूरी प्रक्रिया नीतियों के खिलाफ रही। भाजपा ने मांग की है कि इन आवंटनों पर तत्काल रोक लगाई जाए और पारदर्शी तरीके से पुनः आवंटन किया जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग की सचिव पवन सैनी ने अपने रिश्तेदार अनिरुद्ध सैनी को शिलारू में दुकान नंबर 27 मात्र ₹2850 प्रतिमाह किराये पर दी, जबकि भाजपा शासनकाल में इसी तरह की दुकानें ₹25,000 से ₹80,000 प्रतिमाह में दी जाती थीं।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा:
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पराला मंडी में 34 दुकानों का आवंटन किया गया, लेकिन 52 आवेदन में से 18 बिना कारण खारिज कर दिए गए।
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टूटू में 8 दुकानों के लिए 17 आवेदन आए, जिनमें से 9 खारिज कर दिए गए।
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शिलारू में 28 दुकानों के लिए 64 आवेदन आए, जिनमें से 36 को अस्वीकार कर दिया गया।
नियमों की अनदेखी:
संदीपनी ने आरोप लगाया कि दुकानें नियम के अनुसार आवंटित नहीं की गईं। तय प्रावधान के मुताबिक 25% दुकानें स्थानीय फल उत्पादकों, 50% थोक विक्रेताओं और 10% सहकारी संस्थाओं को दी जानी चाहिए थीं, लेकिन इस प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ।
सीए स्टोर का मामला:
उन्होंने कहा कि पराला मंडी का सीए स्टोर, जिसकी लागत लगभग ₹100 करोड़ है और जिससे हर साल करीब ₹10 करोड़ का लाभ संभव है, उसे लुधियाना की अरमान एंटरप्राइज नामक कंपनी को केवल ₹3.36 करोड़ में दिया गया। यह करार 19 जुलाई 2025 को हुआ, लेकिन अब तक ₹6.70 करोड़ की सिक्योरिटी डिपॉजिट जमा नहीं की गई। भाजपा का आरोप है कि इस मामले में भी सांठगांठ हो रही है।
बेस प्राइस में हेरफेर:
संदीपनी भारद्वाज के अनुसार दुकानों से लेकर सीए स्टोर तक आवंटन मूल्य सिर्फ 1% बढ़ाकर तय कर दिए गए। उदाहरण के तौर पर –
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सीए स्टोर का बेस प्राइस ₹3.35 करोड़ था और आवंटन ₹3.36 करोड़ में हुआ।
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पराला मंडी की दुकानों का बेस प्राइस ₹4510 था और आवंटन ₹4600 में किया गया।
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टूटू की दुकानों का बेस प्राइस ₹5157 और ₹8057 था, जबकि आवंटन क्रमशः ₹5300 और ₹9500 में हुआ।
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शिलारू की दुकानों का बेस प्राइस ₹2700 था और आवंटन ₹2850 में कर दिया गया।
भाजपा का कहना है कि यह पूरे का पूरा मामला “महा घोटाला” है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
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