गुरुकुल इंटरनेशनल स्कूल, सोलन में STEM आधारित अनुभवात्मक शिक्षण पर नवाचारपूर्ण कार्यशाला का आयोजन
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गुरुकुल इंटरनेशनल सीनियर सेकेंडरी स्कूल, सोलन में दिनांक 11 जून 2025 को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के तत्वावधान में “प्रेरक STEM शिक्षकों के माध्यम से अनुभवात्मक शिक्षा” विषय पर एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस आयोजन में सोलन ज़िले के विभिन्न विद्यालयों से आए शिक्षकों ने हिस्सा लिया और विज्ञान, गणित, कंप्यूटर, इतिहास, अंग्रेज़ी तथा अन्य विषयों को STEM (विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग और गणित) ढांचे में प्रस्तुत करते हुए अपने शोध व नवाचार साझा किए।
कार्यशाला में गुरुकुल इंटरनेशनल स्कूल के आठ शिक्षकों ने भी भाग लिया, जिनमें शामिल थे: श्रीमती नेहा वर्मा (रसायन), सुश्री सारिका गुलेरिया (विज्ञान), श्रीमती ज्योति चौधरी (जीवविज्ञान), श्रीमती कुसुम (गणित), श्री यश पुनिया (कंप्यूटर, बाल भारती पब्लिक स्कूल), सुश्री प्रियंका (इतिहास), सुश्री हर्षा (गणित) तथा श्रीमती अंशु पांटा (अंग्रेज़ी) और श्री उज्ज्वल वालिया (अर्थशास्त्र)। इन सभी शिक्षकों ने दिखाया कि कैसे पारंपरिक पढ़ाई से आगे बढ़कर छात्रों को परियोजना-आधारित, प्रयोगात्मक और बहु-विषयी शिक्षण अनुभव दिए जा सकते हैं।
प्रस्तुतियों में डिजिटल टूल्स, कोडिंग, रोबोटिक्स, डेटा विश्लेषण, गणितीय मॉडलिंग, तथा भाषा व सामाजिक विज्ञान में तकनीक के प्रयोग जैसे विविध आयामों को उजागर किया गया। इससे यह सिद्ध हुआ कि STEM केवल एक शिक्षण पद्धति नहीं, बल्कि एक ऐसा माध्यम है जो छात्रों में वैज्ञानिक सोच, तार्किक विश्लेषण, समस्या समाधान की योग्यता और रचनात्मकता को बढ़ावा देता है।
इस कार्यशाला में शिक्षकों द्वारा प्रस्तुत शोधपत्रों का मूल्यांकन सीबीएसई द्वारा नामित विशेषज्ञों की समिति ने किया, जिसमें सम्मिलित थे: डॉ. राहुल श्रीवास्तव (प्रोफेसर, जैव प्रौद्योगिकी, जेपी विश्वविद्यालय), श्रीमती वंदना शर्मा (प्रधानाचार्या, साईं ब्लाइट इंटरनेशनल स्कूल, धर्मपुर), और श्री विनोद कुमार शर्मा (प्रधानाचार्य, बाल भारती स्कूल, सोलन)। इन विशेषज्ञों ने प्रतिभागी शिक्षकों की रचनात्मकता, शोध की गहराई और STEM सिद्धांतों के समावेशन की सराहना की।
विद्यालय की प्रधानाचार्या डॉ. लखविंदर अरोड़ा ने धन्यवाद ज्ञापन में सभी अतिथियों और प्रतिभागियों को शुभकामनाएँ दीं और कहा कि ऐसे आयोजन शिक्षकों में नवीनता को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ उन्हें 21वीं सदी के आवश्यक कौशलों के प्रति सजग करते हैं। उन्होंने STEM को न केवल एक शिक्षण उपकरण, बल्कि भविष्य निर्माण की दिशा में एक क्रांतिकारी दृष्टिकोण बताया।
यह कार्यशाला अपने संवादात्मक वातावरण, नवाचारों से भरे सत्रों और शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी के कारण एक प्रेरणादायक अनुभव साबित हुई। गुरुकुल का यह आयोजन इस बात का प्रमाण बना कि यह संस्थान आधुनिकता, नवाचार और शैक्षणिक मूल्यों के अद्भुत समन्वय का प्रतीक है।
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