Breach of Trust by Hon’ble CM of Himachal Pradesh ~ Dr. Rajeev Bindal (BJP)
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हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री सुखविंदर सिंह सुक्खु पर राज्य के बेरोजगार युवाओं के विश्वास को तोड़ने का गंभीर आरोप लगाया गया है। एक मीडिया चैनल को दिए गए इंटरव्यू में मुख्यमंत्री द्वारा यह कहना कि उन्होंने कभी सरकारी नौकरी देने की कोई गारंटी नहीं दी, युवाओं के साथ किए गए वादों से पूरी तरह मुकरना है। चुनाव के समय उन्होंने घोषणा की थी कि राज्य में 67,000 खाली सरकारी पद हैं और 33,000 नए पदों का सृजन करके कुल 1 लाख नौकरियाँ दी जाएँगी, वो भी पहली ही कैबिनेट में। अब इस बात से साफ इनकार कर देना युवाओं के साथ वादाखिलाफी और विश्वासघात है।
डॉ. राजीव बिंदल ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि केवल मुख्यमंत्री ही नहीं बल्कि कांग्रेस पार्टी के सभी प्रमुख नेताओं ने चुनाव प्रचार के दौरान एक लाख सरकारी नौकरियाँ और कुल मिलाकर पाँच लाख रोजगार देने की बात कई बार कही थी। यह सब रिकॉर्डिंग के रूप में आम जनता के मोबाइल फोन में मौजूद है।
श्रीमती प्रियंका गांधी ने भी खुले मंचों से जोर-शोर से यही वादे किए थे, जबकि वर्तमान उपमुख्यमंत्री श्री मुकेश अग्निहोत्री तो हर गली और गाँव में यह कहते घूमते रहे कि वे पक्की, पेंशन वाली नौकरियाँ देंगे और अनुबंध आधारित नौकरियों को समाप्त करेंगे। उनके द्वारा पाँच लाख नौकरी देने की बात को खुद उनकी गारंटी बताया गया। श्रीमती अल्का लांबा ने भी चुनावी रैलियों में इन वादों को अत्यंत भावनात्मक तरीके से प्रस्तुत किया था।
डॉ. बिंदल ने यह आरोप लगाया कि कांग्रेस ने युवाओं की भावनाओं का इस्तेमाल केवल सत्ता में आने के लिए किया। गली-गली, दीवार-दीवार पर नौकरी देने की गारंटी लिखवाकर, हर मंच से यही वादा करके युवाओं को लुभाया गया। परिणामस्वरूप, बेरोजगार युवा कांग्रेस के पक्ष में मतदान करने के लिए प्रेरित हुए और इस सरकार को सत्ता में लाने में अहम भूमिका निभाई।
उन्होंने कहा कि अब जबकि सत्ता मिल चुकी है, वही युवा जिन्हें आश्वासन देकर वोट लिए गए, उपेक्षित और अपमानित महसूस कर रहे हैं। मुख्यमंत्री का यह बयान कि उन्होंने कोई नौकरी देने का वादा नहीं किया, सरासर धोखा है, यह न केवल एक नैतिक अपराध है बल्कि युवाओं की उम्मीदों और संघर्ष के साथ क्रूर मजाक है।
डॉ. बिंदल ने यह भी कहा कि जिन युवाओं ने अपने कंधों पर उठाकर सत्ता के शिखर तक पहुँचाया, उन्हीं को भुला देना अन्याय, शोषण और विश्वासघात है। ऐसे नेताओं को सत्ता में बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
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