भाजपा विधायक सुधीर शर्मा ने प्रदेश के मुख्यमंत्री पर गंभीर आरोप लगाए
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उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के प्रदेश लौटने के बाद जिस तरह से उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस की, उससे साफ झलकता है कि सरकार स्वर्गीय विमल नेगी की मौत सहित किसी भी संवेदनशील मुद्दे को लेकर गंभीर नहीं है।
उन्होंने बताया कि इस मामले की जांच 18 मार्च को एसीएस होम के स्तर पर शुरू हुई और 7 अप्रैल को रिपोर्ट तैयार होकर मुख्यमंत्री को सौंप दी गई। इसके बाद 14 मई तक यह फाइल कहां रही, यह सवाल अब भी अनुत्तरित है। शर्मा ने पूछा कि यह दस्तावेज सचिवालय में किन लोगों के पास था और इतने समय तक क्या किया गया? उन्होंने मांग की कि इस पूरे प्रकरण की सीबीआई जांच होनी चाहिए।
विधायक ने यह भी आलोचना की कि मुख्यमंत्री का यह कहना कि वे दौरे के समय किसी से चर्चा नहीं करते, बेहद हैरान करने वाला है। आम तौर पर, जब भी मुख्यमंत्री यात्रा पर होते हैं तो ज़रूरी फाइलें उनके पास भेजी जाती हैं ताकि त्वरित निर्णय लिए जा सकें।
इसके अलावा उन्होंने प्रेस वार्ता को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि पत्रकार वार्ता सचिवालय परिसर में आयोजित की गई लेकिन उसमें ऐसे लोगों को बुलाया गया जिनका सरकार या प्रशासन से कोई सीधा संबंध नहीं है। उन्होंने इसे गंभीरता की कमी बताया।
राज्यसभा चुनाव और बालूगंज थाने में चल रही कार्रवाई को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाए कि इतने संवेदनशील मुद्दों पर केवल कुछ चुनिंदा मीडिया संस्थानों को ही बुलाया गया। उन्होंने यह भी कहा कि विमल नेगी के परिवार को पहले से ही आशंका थी कि उन्हें प्रदेश में न्याय नहीं मिलेगा।
शर्मा ने आरोप लगाया कि विधानसभा में दिए गए मुख्यमंत्री के वक्तव्यों से वे खुद पीछे हटते नजर आ रहे हैं, जिससे यह साबित होता है कि सरकार इस मुद्दे को लेकर कभी भी गंभीर नहीं रही। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा उच्च न्यायालय और न्यायाधीशों को लेकर की गई टिप्पणी बेहद गैर-जिम्मेदाराना है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में माफिया जैसा सिस्टम काम कर रहा है, जो सरकार की जगह ‘मित्र मंडली’ चला रही है।
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