एचपीवी टीकाकरण और माहवारी स्वच्छता को लेकर जागरूकता शिविर
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स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, सोलन की ओर से राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक कन्या पाठशाला सोलन में किशोरियों और अभिभावकों के लिए एचपीवी (ह्यूमन पेपिलोमा वायरस) टीकाकरण तथा माहवारी स्वच्छता विषय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। शिविर की अध्यक्षता जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. गगन ने की।
डॉ. गगन ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य किशोरियों और उनके अभिभावकों को एचपीवी संक्रमण, इससे बचाव में टीकाकरण की भूमिका तथा माहवारी के दौरान आवश्यक स्वास्थ्य एवं स्वच्छता संबंधी सावधानियों के बारे में वैज्ञानिक जानकारी देना था।
उन्होंने बताया कि एचपीवी एक आम वायरस है और इसके कुछ प्रकार भविष्य में सर्वाइकल कैंसर समेत कुछ अन्य कैंसर का कारण बन सकते हैं। उन्होंने एचपीवी संक्रमण की रोकथाम के लिए टीकाकरण को महत्वपूर्ण निवारक उपाय बताया। उन्होंने 14 से 15 वर्ष की आयु की बालिकाओं को एचपीवी वैक्सीन लगवाने के लिए प्रोत्साहित करने की बात कही।
डॉ. गगन ने अभिभावकों से अपील की कि वे एचपीवी वैक्सीन से जुड़ी अपुष्ट जानकारियों, भ्रांतियों और अफवाहों से बचें तथा टीकाकरण संबंधी जानकारी के लिए स्वास्थ्य विभाग के प्रमाणित स्रोतों और स्वास्थ्यकर्मियों से संपर्क करें। उन्होंने कहा कि टीकाकरण का उद्देश्य भविष्य में एचपीवी संक्रमण से होने वाली गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं, विशेष रूप से सर्वाइकल कैंसर, के जोखिम को कम करना है। वैक्सीन को लेकर किसी भी सवाल या संभावित दुष्प्रभाव की स्थिति में चिकित्सक अथवा स्वास्थ्यकर्मी से परामर्श लेने की सलाह दी गई।
जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉ. प्रियंका ने माहवारी को शरीर की एक स्वाभाविक जैविक प्रक्रिया बताते हुए छात्राओं को इसके प्रति बिना झिझक और संकोच के सही जानकारी अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने माहवारी के दौरान व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखने और स्वच्छ व सुरक्षित सैनिटरी पैड अथवा उपयुक्त मासिक धर्म स्वच्छता सामग्री के इस्तेमाल पर जोर दिया।
उन्होंने सलाह दी कि सैनिटरी पैड को लंबे समय तक इस्तेमाल न किया जाए और सामान्य परिस्थितियों में जरूरत के अनुसार करीब 4 से 6 घंटे के अंतराल पर इसे बदला जाए। अधिक रक्तस्राव होने पर पैड इससे पहले भी बदलना चाहिए। इस्तेमाल किए गए पैड के उचित निपटान के साथ-साथ पैड बदलने से पहले और बाद में साबुन से हाथ धोने की आवश्यकता भी बताई गई।
डॉ. प्रियंका ने किशोरियों को पर्याप्त पानी पीने तथा पौष्टिक और संतुलित भोजन लेने की सलाह दी। उन्होंने भोजन में आयरन, प्रोटीन, कैल्शियम और विटामिन युक्त खाद्य पदार्थों को शामिल करने के लिए कहा। हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें, फल, दूध एवं दुग्ध उत्पाद तथा अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ नियमित आहार का हिस्सा बनाने पर भी बल दिया गया।
उन्होंने कहा कि अत्यधिक रक्तस्राव, बहुत अधिक दर्द, चक्कर आना, कमजोरी या माहवारी में अनियमितता जैसी समस्या होने पर चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि माहवारी से संबंधित गलत धारणाओं को दूर कर किशोरियों तक सही और वैज्ञानिक जानकारी पहुंचाना उनके स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।
कार्यक्रम के दौरान छात्राओं और अभिभावकों ने एचपीवी वैक्सीन, माहवारी स्वच्छता और किशोर स्वास्थ्य से जुड़े सवाल विशेषज्ञों के समक्ष रखे। विशेषज्ञों ने उपस्थित लोगों की जिज्ञासाओं का विस्तार से समाधान किया।
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