स्तन कैंसर के बढ़ते मामलों पर डॉ. कुक्कर ने किया जागरूक
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स्तन कैंसर के बढ़ते मामलों को लेकर जागरूकता जरूरी: डॉ. संदीप कुक्कर
मोहाली, 28 अगस्त: भारत में कैंसर के बढ़ते मामलों के बीच लोगों में जागरूकता और समय पर जांच को बढ़ावा देने की जरूरत है। पार्क अस्पताल, मोहाली के डायरेक्टर, मेडिकल ऑन्कोलॉजी, डॉ. संदीप कुक्कर ने कहा कि देश में कैंसर के लगभग 30 लाख मरीज हैं। हर साल करीब 15.6 लाख नए मामले सामने आते हैं और लगभग 8.7 लाख लोगों की कैंसर से मृत्यु होती है।
उन्होंने बताया कि महिलाओं में स्तन कैंसर और सर्वाइकल कैंसर, जबकि पुरुषों में फेफड़े और लिवर कैंसर प्रमुख रूप से देखे जाते हैं। उनके अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में स्तन कैंसर के मरीजों की आयु-प्रोफाइल में भी बदलाव आया है। जहां पहले यह बीमारी अधिकतर 50 वर्ष से ज्यादा उम्र की महिलाओं में देखने को मिलती थी, वहीं अब कम उम्र की महिलाओं में भी इसके मामले बढ़ रहे हैं। वर्तमान में करीब 50 प्रतिशत स्तन कैंसर के मामले 25 से 50 वर्ष की आयु के बीच सामने आ रहे हैं।
डॉ. कुक्कर ने चिंता जताई कि 70 प्रतिशत से ज्यादा मरीजों में बीमारी का पता एडवांस स्टेज में चलता है। इससे उपचार की प्रभावशीलता कम हो सकती है और मृत्यु का जोखिम बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि कैंसर के लगभग एक-तिहाई मामलों को जीवनशैली में आवश्यक सुधार करके रोकने की संभावना रहती है।
उन्होंने लोगों को संतुलित एवं पौष्टिक भोजन लेने, नियमित शारीरिक गतिविधि करने और धूम्रपान तथा शराब से दूर रहने की सलाह दी। उन्होंने स्वास्थ्य संबंधी किसी भी असामान्य बदलाव को नजरअंदाज न करने पर भी जोर दिया।
पुरुषों में पाए जाने वाले प्रमुख कैंसर में फेफड़े, प्रोस्टेट, कोलोरेक्टल, पेट और लिवर कैंसर शामिल हैं। वहीं महिलाओं में स्तन, कोलोरेक्टल, फेफड़े, सर्वाइकल और पेट के कैंसर प्रमुख हैं। डॉ. कुक्कर के मुताबिक, ब्रेस्ट सेल्फ-एग्जामिनेशन और मैमोग्राफी स्तन कैंसर की शुरुआती पहचान में मददगार हो सकते हैं। इसी तरह कुछ अन्य कैंसर की स्क्रीनिंग के लिए छाती का एक्स-रे और PSA जैसी जांचों का उपयोग किया जाता है।
आधुनिक सर्जरी से उपचार के विकल्पों में विस्तार
डॉ. कुक्कर ने बताया कि कैंसर के इलाज में रोबोटिक और लैप्रोस्कोपिक सर्जरी का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। भोजन नली, पेट, अग्न्याशय, गर्भाशय और मलाशय जैसे अंगों में मौजूद ट्यूमर की सर्जरी के लिए इन आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा सकता है।
रोबोटिक सर्जरी से कई मामलों में ऑपरेशन के दौरान कम दर्द और रक्तस्राव, अस्पताल में कम समय तक रहने तथा अपेक्षाकृत जल्दी सामान्य गतिविधियों में लौटने जैसे लाभ मिल सकते हैं। इसके अलावा कॉस्मेटिक परिणाम भी बेहतर हो सकते हैं।
उन्होंने कहा कि इम्यूनोथेरेपी और टार्गेटेड थेरेपी जैसी नई उपचार पद्धतियों ने कैंसर के इलाज के क्षेत्र में संभावनाएं बढ़ाई हैं। इन तकनीकों में बीमारी की विशेषताओं के आधार पर कैंसर कोशिकाओं को लक्षित करने का प्रयास किया जाता है। उपयुक्त मरीजों में इससे सामान्य कोशिकाओं को होने वाले नुकसान और उपचार से जुड़े कुछ दुष्प्रभावों को कम करने में मदद मिल सकती है तथा जीवन की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है।
मोहाली में कैंसर उपचार की व्यापक सुविधा
पार्क हॉस्पिटल्स के ग्रुप सीईओ-नॉर्थ आशीष चड्ढा ने बताया कि पार्क ग्रीशियन अस्पताल, मोहाली, ट्राईसिटी में एक ही स्थान पर व्यापक कैंसर उपचार सुविधा उपलब्ध कराने वाले शुरुआती अस्पतालों में शामिल रहा है।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के ऊना, हमीरपुर, बिलासपुर, मंडी, कुल्लू, मनाली, सोलन और शिमला समेत विभिन्न क्षेत्रों से मरीज यहां उपचार के लिए पहुंचते हैं। उनके अनुसार अस्पताल हिमाचल प्रदेश सरकार के साथ-साथ ECHS, CGHS, ESI, CAPF, आयुष्मान, प्रमुख TPA और कॉरपोरेट संस्थानों से संबद्ध है।
आशीष चड्ढा ने यह भी बताया कि पार्क अस्पताल, मोहाली में PET स्कैन करीब 11,999 रुपये की दर पर उपलब्ध कराया जा रहा है।
स्तन में बदलाव दिखे तो चिकित्सकीय सलाह लें
डॉ. कुक्कर ने महिलाओं को स्तन से जुड़े असामान्य बदलावों पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी। स्तन में गांठ, त्वचा का मोटा होना, लालिमा या सूजन, निप्पल का अंदर की ओर जाना, निप्पल से असामान्य स्राव और बगल में गांठ ऐसे संकेत हैं जिनकी चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है।
सर्वाइकल कैंसर के संदर्भ में उन्होंने असामान्य योनि रक्तस्राव, दुर्गंधयुक्त स्राव और संभोग के बाद रक्तस्राव जैसे लक्षणों को भी गंभीरता से लेने की बात कही।
उनके अनुसार, कैंसर की पहचान जितनी जल्दी हो और उपचार जितनी शुरुआती अवस्था में शुरू किया जाए, मरीज के लिए परिणाम उतने बेहतर होने की संभावना रहती है। इसलिए लगातार या असामान्य लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टर से सलाह लेने में देरी नहीं करनी चाहिए।
किन कारणों से बढ़ सकता है स्तन कैंसर का जोखिम?
डॉ. कुक्कर ने बताया कि स्तन कैंसर के जोखिम से जुड़े कारकों में परिवार में बीमारी का इतिहास, बढ़ती उम्र, पहले स्तन में गैर-कैंसरकारी गांठ का होना, असंतुलित आहार और जीवनशैली, धूम्रपान, शराब का सेवन, मोटापा तथा लंबे समय तक एस्ट्रोजन के संपर्क में रहना शामिल हो सकते हैं।
उन्होंने लोगों से समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराने और जीवनशैली को स्वस्थ बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि जागरूकता, उचित जांच और समय पर इलाज के जरिए कैंसर से जुड़ी गंभीर जटिलताओं और मृत्यु के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण मदद मिल सकती है।
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