देश का माहौल एक राष्ट्र-एक चुनाव के पक्ष में: अनुराग सिंह ठाकुर

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प्रेस विज्ञप्ति
देश का माहौल एक राष्ट्र-एक चुनाव के पक्ष में: अनुराग सिंह ठाकुर
कांग्रेस ने अपने लाभ के लिए पूर्व में एक राष्ट्र-एक चुनाव स्थगित किए: अनुराग सिंह ठाकुर
22 अप्रैल 2025, श्रीनगर: पूर्व केंद्रीय मंत्री व हमीरपूर लोकसभा क्षेत्र से सांसद श्री अनुराग सिंह ठाकुर ने आज जम्मू कश्मीर प्रवास के दौरान श्रीनगर में एक राष्ट्र एक चुनाव को लेकर जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि आज पूरे देश का माहौल एक राष्ट्र एक चुनाव के पक्ष में है।
श्री अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा “ एक राष्ट्र-एक चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी के देशव्यापी अभियान का असर देखने को मिल रहा है। आज देश का माहौल एक राष्ट्र-एक चुनाव के पक्ष में है। ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ फॉर्मूला लागू करना देश के लिए फायदेमंद साबित होगा क्योंकि यह न केवल विभिन्न चुनावों पर होने वाले खर्चों में कटौती करेगा, बल्कि इससे काफी समय भी बचेगा। राजनीतिक दलों, उम्मीदवारों, अन्य संस्थानों और केंद्र द्वारा (2024) लोकसभा चुनावों में लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये खर्च किये गए थे, जिसे बचाया जा सकता है। यह भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 1.5 प्रतिशत जोड़ सकता है। इस तरह, यह भारत के लिए लाभकारी स्थिति होगी, जिसमें लोगों को पांच साल के लिए एक अच्छी सरकार मिलेगी”
श्री अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा “ आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में सरकार परफॉर्म, रिफॉर्म और ट्रांसफॉर्म पर यकीन करती है। आज अगर देश इतनी तेज गति से विकास कर रहा है तो इसका श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जाता है। ये बिल भी उसी दिशा में उठाया गया एक कदम है। जब आदर्श आचार संहिता लागू होती है, तो इससे विकास कार्य धीमा हो जाता है तथा चुनाव कराने से पहले और बाद में बहुत समय बर्बाद होता है, जिसमें आमतौर पर 45 से 90 दिन लगते हैं। एक राष्ट्र, एक चुनाव’ के लागू होने से, जो अधिकारी आमतौर पर चुनाव कराने में व्यस्त रहते हैं वे अपने प्राथमिक कर्तव्यों पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे। लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराये जाते हैं, तो देश को फायदा ही होगा। यह पहल चुनावी प्रक्रिया को व्यवस्थित करने, चुनावों के कारण होने वाली बाधाओं को कम करने और संसाधनों के प्रभावी उपयोग को सुनिश्चित करने का प्रयास है”
श्री अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा “ये कोई पहली बार नहीं है जब ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ होगा। इससे पहले देश में 1952 से 1967 तक ये प्रक्रिया लागू थी, लेकिन बाद में कांग्रेस ने अपने फायदे के लिए बार-बार सरकारें गिराईं या अन्य कारणों से गिरीं, जिसके बाद ये चुनाव अलग-थलग हो गए। यह विधेयक भारत में शासन प्रणाली में सुधार लाने की क्षमता रखता है, जिससे नीतिगत गतिरोध को रोका जा सकेगा, संसाधनों का पुनर्निर्देशन कम होगा और सरकार पर आर्थिक बोझ कम होगा”

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