प्रदेश सरकार योजना के कार्यान्वयन और कमीशनिंग में असमर्थ: कश्यप
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प्रदेश सरकार योजना के कार्यान्वयन और कमीशनिंग में असमर्थ: कश्यप
साल 2016 में, केंद्र सरकार ने नाहन जिला अस्पताल को यशवंत सिंह परमार मेडिकल कॉलेज में अपग्रेड करने की मंजूरी दी थी, और इस परियोजना के लिए केंद्र और राज्य सरकार के बीच 90:10 की वित्तीय साझेदारी तय की गई थी।
सुरेश कश्यप ने लोकसभा में उठाया मेडिकल कॉलेज निर्माण में देरी का मुद्दा
शिमला, भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और सांसद सुरेश कश्यप ने बताया कि उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष का आभार व्यक्त करते हुए नियम 377 के तहत अपनी बात रखने का अवसर प्राप्त किया। कश्यप ने माननीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री के ध्यान में लाने का प्रयास किया कि उनके लोकसभा क्षेत्र शिमला के सिरमौर जिले के नाहन स्थित यशवंत सिंह परमार मेडिकल कॉलेज का निर्माण कार्य देरी का सामना कर रहा है और बुनियादी ढांचे की गंभीर समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है।
कश्यप ने कहा कि पहले भी उन्होंने सदन में इस मुद्दे को उठाया था। वर्ष 2016 में केंद्र सरकार ने नाहन के जिला अस्पताल को मेडिकल कॉलेज में बदलने के लिए स्वीकृति दी थी, और इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार ने 90:10 के अनुपात में निधि साझेदारी तय की थी। योजना के पहले चरण के लिए 189 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया था, जिसमें से केंद्र ने हिमाचल प्रदेश सरकार को 170 करोड़ रुपये की राशि जारी कर दी है।
हालांकि, कश्यप का आरोप है कि राज्य सरकार इस परियोजना के क्रियान्वयन और कमीशनिंग में असफल साबित हो रही है। प्रदेश सरकार इस योजना को गंभीरता से नहीं ले रही है, जिसके कारण अस्पताल में सुविधाओं का विस्तार नहीं हो पा रहा है और क्षेत्र की स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने में कठिनाइयाँ आ रही हैं। आठ साल बाद भी यह संस्थान पूरी तरह से कार्यात्मक नहीं हो सका है।
कश्यप ने बताया कि रोजाना लगभग 1000 मरीजों की औसत उपस्थिति वाले ओपीडी में अत्यधिक भीड़ के कारण चार डॉक्टरों को एक छोटे से कमरे में काम करना पड़ता है। निर्माण कार्य में दो साल से अधिक समय की देरी के कारण राज्य में स्वास्थ्य सेवा और चिकित्सा शिक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। अस्पताल में जगह की कमी, पार्किंग की समस्या, सीमित सुविधाएं और आवश्यक बुनियादी ढांचे की कमी के कारण मरीजों को आवश्यक सेवाओं के लिए राज्य से बाहर जाना पड़ रहा है।
इसके अलावा, रेडियोग्राफरों और नर्सों के लिए प्रशिक्षिण सुविधाओं की कमी और छात्रों तक संसाधनों की सीमित पहुँच के कारण संस्थान क्षेत्र की आवश्यकताओं को पूरा करने में असमर्थ है। कश्यप ने केंद्र सरकार से इस परियोजना की गंभीरता को समझते हुए शीघ्र कार्रवाई करने का अनुरोध किया, ताकि इसे जल्द से जल्द जनता को समर्पित किया जा सके।
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